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प्रदेश में नशीली दवाओं के नियंत्रण के लिए सीएम ने दिए ये आदेश

Fri, 19 Aug 2016 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि नशीली दवाओं से संबंधित नियमों और अधिनियमों में संशोधन किया जाना चाहिए, जिससे दंड के प्रावधानों को और कठोर बनाया जा सके। नशीली दवाओं के निर्माताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के साथ-साथ इनके विक्रेताओं और खुले तौर पर इन्हें बेचने वालों के गठजोड़ को समाप्त करने के लिए नियमों और अधिनियमों में कुछ संशोधन जरूरी हैं।
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मुख्यमंत्री वीरवार को राज्य में नशीली दवाओं के नियंत्रण के लिए जारी आदेशों की अनुपालना की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बरसात के मौसम के बाद भांग की खेती को उखाड़ने का सही समय है और यह सुनिश्चित बनाया जाए कि उखाड़ी गई भांग पूरी तरह से नष्ट की जाए।

वीरभद्र सिंह ने पुलिस विभाग को कुछ विदेशियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में और अधिक दवा निरीक्षक तैनात करने पर भी अपनी सहमति दी। नशीली दवाओं के सेवन से ग्रस्त लोगों का पुनर्वास महत्वपूर्ण है और गैर सरकारी संस्थाओं को प्रदेश में विशेषकर बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में नशा मुक्ति केंद्र खोलने के लिए आगे आना चाहिए।
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बैठक में दंडाधिकारियों, न्यायवादियों और पुलिस अधिकारियों की क्षमता निर्माण आकलन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी चर्चा की गई। मुख्य सचिव वीसी फारका ने भांग के समूल नष्ट करने का सुझाव देते हुए कहा कि अन्य फसलों को उगाने के प्रयास किए जाने चाहिए। लोगों को सेब और अन्य नकदी फसलों को उगाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने ड्रग्स एवं कॉसमेटिक अधिनियम की धारा-18 सी के उल्लंघन को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध बनाने का प्रस्ताव किया, जिससे दवाओं के दुरुपयोग को रोक जा सके। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को कुछ दवाओं को नियंत्रित दवाएं घोषित करने का आग्रह करने के लिए पत्र लिखने का सुझाव दिया।

जिससे दवा भंडारों में दवाओं की मात्रा से संबंधित निरीक्षण किया जा सके। पुलिस महानिदेशक संजय कुमार ने कहा कि मई 2016 तक अपराध सिद्धि की दर 25 प्रतिशत थी। जुलाई अंत तक बढ़कर 33.03 प्रतिशत हुई है और यह एक सकारात्मक संकेत है। बैठक में प्रदेश सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे।

सीएम बोले, फॉरेस्ट क्लीयरेंस को दी जाए प्राथमिकता
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वन विभाग को परियोजनाओं के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस को प्राथमिकता देने के लिए कहा है। सीएम ने कहा है कि वन विभाग की प्रक्रियाओं, औपचारिकताओं के कारण कई मामले लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग स्वीकृतियों के लिए वन विभाग को पूर्ण रूप से तैयार मामले भेजें।

अगर किसी विभाग को कठिनाई आती है तो वन विभाग के नोडल अधिकारी संबंधित विभाग के कर्मचारियों को सहयोग दें। उन्हें नियमों के बारे में बताना चाहिए कि वे किस तरह मामले पेश करें। संबंधित विभागों के नोडल अधिकारियों के साथ साप्ताहिक बैठकें भी की जानी चाहिए।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि एक हेक्टेयर वन क्षेत्र पर 13 प्रकार की विशिष्ट विकासात्मक गतिविधियां आरंभ की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एक हेक्टेयर तक वन भूमि को विकासात्मक परियोजनाओं के लिए बदला जा सकता है। संबंधित वन मंडलाधिकारी को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, जिससे लोगों को लाभान्वित करने के लिए अधिक से अधिक विकासात्मक गतिविधियां चलाई जा सकें।

मुख्य सचिव ने किन्नौर और लाहौल एवं स्पीति जिले की वन स्वीकृतियों का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि अन्य वन मंडलाधिकारियों को भी इसी तरह वन अधिकार अधिनियम और वन संरक्षण अधिनियम के तहत शामिल 13 सेवाओं को

स्वीकृति प्रदान करनी चाहिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान, प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन एसपी वासुदेवा और प्रदेश सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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