आशु पर मढ़े गए सिद्धू के आरोपों के एक दिन बाद आम आदमी पार्टी (आप) के उप-नेता सरबजीत कौर मनुके ने शुक्रवार को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा "कोई मंत्री या संतरी (मंत्री या अधिकारी)" नहीं बख्शा। इसके साथ ही मनुके ने सिद्धू को 'ईमानदार मंत्री' करार दिया और अधिकारियों पर उंगली उठाई व आशु का इस्तीफा मांगा।
बता दें सिद्धू ने आशु पर आरोप लगाया था कि लुधियाना के ईशर नगर क्षेत्र में एक आवासीय परियोजना ग्रैंड मैनर होम्स को सीएलयू की सम्पत्ति दे दी गई हालांकि इस पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में उसे "जाली" दस्तावेजों का उपयोग करके हासिल कर लिया गया।
वहीं आशु से पूछे जाने पर कि क्या जांच रिपोर्ट में उनका नाम राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है, आशु ने कहा, "सिद्धू इसे बेहतर तरीके से समझा सकते हैं।" सिद्धू ने बताया कि सीएलयू के लिए आवेदन 17 जनवरी, 2018 को प्रस्तुत किया गया था और संलग्न दस्तावेज जाली थे। उन्होंने कहा कि जमीन की रजिस्ट्री दो दिन बाद 19 जनवरी को की गई थी, जबकि सीएलयू के लिए आवेदन करते समय रजिस्ट्री के कागजात संलग्न करना अनिवार्य है। "इसका मतलब है कि आवेदक सीएलयू के लिए आवेदन करने के समय जमीन का मालिक नहीं था।
सिद्धू ने प्रमुख सचिव से 7 जुलाई, 2018 को उनके द्वारा जारी किए गए आदेशों की अवहेलना करने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है जिसमें सीएलयू अनुमोदन के मामले को रखने की बात भी सामने आई।