नशे की रोकथाम में जुटी पंजाब पुलिस नियमों की अवहेलना कर रही है। तीन साल पुराने केस में अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाते हुए 150 ग्राम नशीले पाउडर के साथ गिरफ्तार हुए आरोपी को बरी कर दिया। इस मामले में एएसआई ने एनडीपीएस धाराएं लगाई थी। हालांकि केवल गजटेड अधिकारी ही एनडीपीएस एक्ट की धाराएं लगा सकता है और तलाशी ले सकता है। एएसआई एडहॉक पर था। मामला थाना अजनाला का है।
अजनाला थाने के एएसआई आज्ञा पाल ने 9 फरवरी 2014 को अमित निवासी अजनाला के पास से 150 ग्राम नशीला पाउडर बरामद करके एफआईआर दर्ज की थी। एएसआई ने रिपोर्ट में लिखा था कि अजनाला बिजली घर के पास उन्होंने नाका लगा रखा था। इसी बीच एक युवक ने पुलिस को देख कर जेब से एक लिफाफा बाहर फेंका। पुलिस ने लिफाफा फेंकने वाले आरोपी को तुरंत पकड़ लिया, जिसकी पहचान अमित कुमार निवासी अजनाला के तौर पर हुई।
लिफाफे में 200 कैप्सूल थे। मामला अदालत में पहुंचा। डिफेंस पक्ष के काउंसिल ने अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह बाजवा के सामने पक्ष रखा कि एनडीपीएस एक्ट के मामले में बिना गजटेड अफसर कोई भी पुलिस कर्मी धाराएं नहीं लगा सकता। पुलिस ने मामला दर्ज करते समय कानून को तोड़ा है। इस दलील के बाद अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया और पुलिस को चेतावनी दी कि वो कानून माने।
पुलिस कानून जाने तो आरोपी को लाभ न मिले
एडवोकेट किरपाल कौर और एडवोकेट नवदीप कौर कहती हैं कि अगर पुलिस कानून को समझे और कानून के तहत काम करे तो आरोपियों को सजा मिलने से कोई नहीं रोक सकता। आम तौर पर पुलिस की लापरवाही के चलते ही आरोपियों को लाभ मिल जाता है।