रिमोट्यॉड आर्थ्राइटिस (जोड़ों का दर्द) से पीड़ित लोगों के लिए एम्स से अच्छी खबर है। पहली बार रिमोट्यॉड आर्थ्राइटिस के इलाज के लिए ऐसी कारगर दवा तैयार की गई है जिसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है और दवा भी बेहद कारगर है।
दवा पर किया जा रहा प्री-क्लीनिकल ट्रायल सफल रहा है और अब एथिकल क्लीयरेंस के बाद दवा का मानव पर परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद आम लोगों के लिए दवा बाजार में उपलब्ध हो सकेगी।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की मदद से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के फॉर्मोकोलॉजी विभाग ने इस दवा को तैयार की है। सबसे अच्छी बात है कि यह दवा औषधीय पौधों से तैयार की गई है। दवा बनाने में सुरंजन, हड़जोड़, दारु हल्दी और धनिया के पौधों का प्रयोग किया गया है। फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से किए गए इस शोध को फरवरी-2016 में इंडियन जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी में प्रकाशित भी किया गया है।
शोध में शामिल फार्माकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. वाई.के. गुप्ता और डॉ. सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि पिछले करीब छह वर्षों से रिमोट्यॉड आर्थ्राइटिस बीमारी के इलाज के लिए दवा पर शोध किया जा रहा है। अब इसके सकारात्मक परिणाम आ गए हैं। प्री-क्लीनिकल ट्रॉयल में सफलता भी मिल गई है। एथिकल क्लीयरेंस के बाद तैयार दवा का मानव पर उपयोग किया जाएगा।