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जमीन तो गई ही, 30 करोड़ भी अटके

Fri, 22 Feb 2013 05:30 AM IST
Chandigarh
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चंडीगढ़। राजीव गांधी चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क के फेज तीन के लिए अधिग्रहित की गई 272 एकड़ जमीन यूटी प्रशासन और दर्जनों किसानों के गले की फांस बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस जमीन के अधिग्रहण को रद कर दिया था। इस वजह से प्रशासन के हाथ से जमीन तो गई ही साथ ही किसानों को मुआवजे के तौर पर दिए गए लगभग 30 करोड़ रुपये भी अटक गए हैं। किसानों ने लगभग छह साल पहले दिए गए मुआवजे को लौटाने से भी हाथ खड़े कर लिए हैं। किसान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जो मुआवजा उन्हें मिला था वह सब खर्च हो चुका है। अब प्रशासन ने दिया गया मुआवजा ब्याज समेत वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला लिया है। प्रशासन द्वारा कोर्ट को आग्रह किया जाएगा कि वह ही किसानों को पैसा लौटाने के आदेश जारी करे।
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बीस प्रतिशत किसानों ने लिया था मुआवजा
प्रशासन ने आईटी पार्क फेज तीन के लिए लगभग छह साल पहले 272 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण के लिए 75 करोड़ रुपये कोर्ट में जमा करा दिए थे। प्रशासन की ओर से 18.75 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को मुआवजा दिया जाना था। कुल 150 किसानों ने मुआवजा लेना था, लेकिन सिर्फ 35 किसानों ने ही मुआवजा लिया। ऐसे में 35 किसानों को कुल 30 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के जमीन अधिग्रहण को रद करने के बाद किसानों ने 30 करोड़ रुपये प्रशासन को लौटाने हैं।
15 जमीन देने को राजी, मगर प्रशासन तैयार नहीं
हाल ही में 15 किसानों ने प्रशासन से मिलकर अनुरोध किया है कि वह पैसे की जगह अपनी जमीन दे सकते हैं। वहीं, प्रशासन जमीन लेना नहीं चाहता है क्योंकि किसानों की जमीन अलग-अलग टुकड़ों में है और प्रशासन उसका उचित उपयोग नहीं कर सकेगा। प्रशासन अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा कर न सिर्फ अपना पैसा वापस मांगने के आदेश जारी करने को कहेगा बल्कि उस पर ब्याज भी मांगेगा। ऐसे में किसानों की भी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
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किसान कर सकेंगे केवल खेती
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यूटी प्रशासन को कहा गया था कि वे आईटी पार्क के दो फेज का तो ठीक ढंग से विकास नहीं कर पाए हैं। यहीं पर लगभग 33 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इस वजह से तीसरे फेज की जरूरत नहीं है। इस फैसले के बाद यूटी प्रशासन ने किसानों को उनकी जमीन वापस करने का निर्णय ले लिया है। प्रशासन ने यह तय किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने इस संबंध में कानूनी राय मांगी थी और कानूनी राय आने के बाद ही यह तय हुआ है कि जिन जिन किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है उन्हें उनकी जमीन वापस की जाएगी और जिन्होंने मुआवजा ले लिया है उनसे पैसे वापस लिए जाएंगे। जिन किसानों को जमीन मिलेगी वह उस पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि नहीं कर पाएंगे। जमीन का उपयोग सिर्फ कृषि के लिए किया जाएगा।
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वर्जन
जिन किसानों को मुआवजा दिया गया था, उनसे ब्याज सहित पैसे वापस लिए जाएंगे। इसे लेकर प्रशासन कानूनी सलाह ले रहा है।
- वीके सिंह, वित्त सचिव, चंडीगढ़

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