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नौकरी मांगने CM भूपेश के घर पहुंचा युवक: सुनाई दुखभरी दास्तां, मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को दिया निर्देश

Fri, 17 Mar 2023 07:19 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

नौकरी पाने के लिए लोग न जाने क्या-क्या प्रयास करते हैं। अपनी किस्मत संवारने के लिए हर तरह के जतन करते हैं ताकि उनकी जिंदगी की नैया पार लग जाए। कुछ ऐसा ही किया है छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम बगईझरियां के एक युवक ने। 
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नौकरी के लिए सीएम भूपेश के घर पहुंचा युवक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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नौकरी पाने के लिए लोग न जाने क्या-क्या प्रयास करते हैं। अपनी किस्मत संवारने के लिए हर तरह के जतन करते हैं ताकि उनकी जिंदगी की नैया पार लग जाए। कुछ ऐसा ही किया है छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम बगईझरियां के एक युवक ने। 

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ग्राम बगईझरियां के युवक दीपक यादव ने नौकरी नहीं मिलने पर सीधे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह निवास पहुंच गया। प्रार्थी युवक की सरलता को देखकर सीएम की पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल ने काफी सहजता से उसकी बातें सुनकर मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने में मदद की। उसे जलपान कराकर घर भेजने तक का इंतजाम कराईं।


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...तो हंसने लगे थे दोस्त
दीपक ने बताया कि जब उसने अपने दोस्तों को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उनके घर आने की बात कही,तो वे हंसने लगे। युवक ने गांव से पत्थलगांव पहुंचा फिर वहां से बस पकड़कर सीधा भिलाई पहुंच गया। इस दौरान मुख्यमंत्री के परिजनों ने युवक की समस्या को जाने, लेकिन उस दौरान मुख्यमंत्री भेंट मुलाकात का कार्यक्रम पाटन में चल रहा था। सीएम के ओएसडी ने युवक को पाटन लाया और मुख्यमंत्री से मिलवाया। 

सीएम ने दिया निर्देश
सीएम ने युवक की समस्या को काफी ध्यान से सुना। इसके बाद जशपुर के कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल को युवक की समस्या का निराकरण करने का निर्देश दिए। वहीं दीपक ने अपनी समस्या का सुझाव  के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा मेरी यात्रा सफल हो गई है। दीपक यादव को अब रोजगार की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उसकी मदद के लिए व्यवस्था की जा रही है। 
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बघेल परिवार ने युवक को दी शुभकामनाएं
युवक ने बताया कि वापस भिलाई आकर सीएम की पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल, पुत्र चैतन्य बघेल और बड़ी बेटी स्मिता बघेल से मिलने का भी मौका मिला। उन्होंने मेरा हालचाल पूछा। मुझे लगा कि जैसे मैं टूट चुका था, सपने भूल गया वो भी जिंदा हो गया। वापस गांव जाने के लिए के टिकट व्यवस्था भी कराई। स्मिता बघेल ने रास्ते के लिए खाने-पीने का सामान दिया। मुकाम हासिल करने के लिए शुभकामनाएं दी।





 
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