महिला कमांडो 15 साल से सामाजिक दायित्व निभा रहीं।
- फोटो : संवाद
चमकते सितारे की तरह महिला कमांडो
पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि, महिला कमांडो चमकते सितारे की तरह हैं जो 15 साल से सामाजिक दायित्व निभाते हुए कर्मठ रूप से कार्य कर रही हैं। समाज में निस्वार्थ रूप में बहुत कुछ इन्होंने दिया है। उन्होंने अपने बचपन की घटना बताते हुए कहा कि, मैं भी जशपुर जिले के एक छोटे से गांव से आता हूं। उस समय पढ़ाई में आम लोगों में कम ही दिलचस्पी रहती थी, लेकिन मुझे मेरी मां ने सपोर्ट किया। उसकी बदौलत आज मैं इस स्थान पर हूं।
छत्तीसगढ़ में करीब 65000 महिला कमांडो द रहीं सेवाएं।
- फोटो : संवाद
जिले में 1200 महिला कमांडो
उन्होंने कहा कि, अगर महिलाएं ठान लें तो परिवर्तन अवश्य ही लाया जा सकता है। पुरुषों में बहुत कुछ फोकस होता है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा महिलाएं आगे-पीछे सभी दृष्टिकोण को देखते हुए कार्य करती हैं। दोनों में बहुत अंतर है। महिलाएं एक के बारे में नहीं, अनेक रिश्तों के बारे में सोचती हैं। उनके प्रयास से समाज में जागरूकता आ सकती है और बहुत कुछ बदला जा सकता है। जिले में लगभग 12500 कमांडो और पूरे छत्तीसगढ़ में लगभग 65000 महिला कमांडो निस्वार्थ सेवा कर रही हैं।
एसपी ने कहा, अगर महिलाओं ने ठान लिया है तो वे जरूर अच्छा कार्य करेंगी व अपराधों में भी कमी आएगी।
- फोटो : संवाद
देखने को मिला परिवर्तन
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि विभिन्न अपराधों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। अगर महिलाओं ने ठान लिया है तो वे जरूर अच्छा कार्य करेंगी व अपराधों में भी कमी आएगी। अब अपराधी को सजा मिलना बहुत ही जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि, कंट्रोल रूम 24 घंटे कार्यरत है। इसके अलावा महिला कमांडो थाना प्रभारी से बेहिचक संपर्क कर सकती हैं। पिछले दिनों गुंडरदेही में भी सभा हुई थी, जहां पर सभी थानों में निर्देश दिया गया था कि महिला कमांडो की शिकायतों को सुनें।
मिशन पूर्ण शक्ति के तहत महिला कमांडो की वापसी हुई।
- फोटो : संवाद
नारी शक्ति, मातृ शक्ति के दम से इस मुकाम पर
पद्मश्री शमशाद बेगम ने कहा कि, नारी शक्ति, मातृशक्ति की बदौलत आज हम सब इस मुकाम पर हैं। महिला कमांडो सामाजिक बुराइयों के लड़ने हेतु निरंतर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि, हमारा मुख्य उद्देश्य शांति कायम करना है, कानून हाथ में लेना नहीं है। पुलिस व जनता का सहयोग से ही महिला कमांडो कार्यरत हैं। उन्होंने महिला कमांडो से कहा कि, वे सेवा के काम के रूप में कार्य करें। स्वयं सेविका के रूप में काम करें। लॉकडाउन के दौरान भी महिला कमांडो ने अच्छा कार्य किया। यह जीवन में एक अभिभूति है।