गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में नदियों से अवैध रेत उत्खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में खंता गांव के ग्रामीणों और वन समिति के पदाधिकारियों ने अवैध रेत उत्खनन का विरोध करते हुए 18 ट्रैक्टरों को पकड़ लिया। हालांकि, अधिकारियों के मौके पर पहुंचने से पहले ही ट्रैक्टर चालक वाहनों सहित फरार हो गए। इस घटना ने वन विभाग, खनिज विभाग और राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों और वन समिति ने की घेराबंदी
मरवाही वन मंडल क्षेत्र के जंगलों से निकलने वाली नदियों में रात के अंधेरे से लेकर सुबह तक अवैध रेत उत्खनन जोरों पर चल रहा है। आज खंता ग्राम पंचायत के ग्रामीणों और वन समिति के लोगों ने जंगल से रेत ले जा रहे 18 ट्रैक्टरों को घेरकर रोक लिया। ट्रैक्टर चालकों के पास रेत उत्खनन या परिवहन के कोई वैधानिक दस्तावेज नहीं थे। ग्रामीणों ने तत्काल अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पंचायत पर वसूली का आरोप
मामले ने तब तूल पकड़ा जब पता चला कि खंता ग्राम पंचायत के कुछ प्रतिनिधियों ने ट्रैक्टर मालिकों से रेत उत्खनन के लिए 5,000 रुपये प्रति ट्रैक्टर बतौर सिक्योरिटी लिए थे। इसके अलावा, जंगल से निकलने वाली रेत पर 350 रुपये प्रति ट्रैक्टर-ट्रॉली के हिसाब से अलग से वसूली भी की जा रही थी। हैरानी की बात यह है कि पंचायत के ही लोगों ने ट्रैक्टरों को पकड़ा, जिससे इस कार्रवाई के पीछे के इरादों पर सवाल उठने लगे। ट्रैक्टर चालकों ने वन समिति के पदाधिकारियों पर भी वसूली का गंभीर आरोप लगाया।
वन विभाग के हाथ खाली
जानकारी मिलने पर वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने जमीनी अमले को मौके पर भेजा, लेकिन कर्मचारी पहुंचने से पहले ही सभी ट्रैक्टर चालक अपने वाहनों सहित फरार हो गए। नतीजतन, 18 ट्रैक्टरों में से एक भी वन विभाग के हाथ नहीं लगा। ग्रामीणों का कहना है कि विभागों की सुस्ती के कारण अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लग पा रही है।
विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस घटना ने खनिज विभाग, वन विभाग और राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जंगल से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में यह धंधा बेरोकटोक जारी है। ग्रामीणों और वन समिति के इस कदम के बावजूद ट्रैक्टर चालकों का फरार होना प्रशासनिक नाकामी को उजागर करता है।