जनशताब्दी एक्सप्रेस को अपने कब्जे में लेकर डकैत उपेंद्र सिंह को छुड़ाने वाले आठ आरोपियों में से तीन को पुलिस ने 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया है। जबिक उपेंद्र और उसके तीन साथी पुलिस को चकमा देकर भाग गये। डीजीपी ने उपेंद्र की सूचना देने वाले को 50 हजार रूपये इनाम देने की घोषणा की है।
गिरफ्तार किये गये आरोपियों में गया का सजींव सिंह, टिंकू और भिलाई खुर्सीपुर का शंकर उर्फ सोनू शामिल है। इन्हे पुलिस ने वीरवार सुबह दुर्ग जिले के खम्हरिया गांव के खार में पकड़ा। ये तीनों पाटन के खम्हरिया गांव के पास कार पलटने के बाद भाग निकले थे। तीनों गांव के बाहर एक खेत के पैरावट में छिपे हुए थे।
साथ ही इस मामले में एसपी रतनलाल डांगी ने लापरवाही बरतने के आरोप में हवलदार वीरेंद्र सिंह, सिपाही सचित शर्मा और आशाराम भास्कर को सस्पेंड कर दिया है। इन पर आरोप है कि निर्देश मिलने के बावजूद भी उपेंद्र को पेशी पर ले जाने के दौरान तीनों अपने साथ कोई हथियार नहीं ले गये थे। इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिये गये हैं।
पुलिस व जेल प्रशासन इस मामले को लेकर आपस में भिड़ गये हैं और दोनों एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। बिलासपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक एसके मिश्रा का कहना है कि उन्होंने लिखित पत्र लिखकर कैदियों के लिए सशस्त्र गार्ड मांगे थे। इसके बाद भी पुलिस ने बिना हथियार के गार्ड को भेज दिया। वहीं एसपी रतनलाल डांगी ने जेल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सिपाही सशस्त्र नहीं थे तो जेल अफसरों को कैदी को हैंडओवर ही नहीं करना चाहिये था।