दशहरा आते ही पूरे देश में जगह-जगह रावण दहन की तैयारियां होती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले का एक गांव ऐसा है जहां सदियों पुरानी परंपरा आज भी जीवंत है। यहां दशहरे के दिन रावण का दहन नहीं होता, बल्कि राजा की सवारी निकाली जाती है। इस अनोखी परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए 44 गांवों के लोग एकत्रित होते हैं।
मुंगेली मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कंतेली में 16वीं सदी से यह परंपरा चली आ रही है। यहां दशहरे के दिन कंतेली जमींदारी परिवार की ओर से राजा की सवारी निकाली जाती है। राजमहल से निकलने वाली यह सवारी कुल देवी मंदिर तक जाती है, जहां राजा मां महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा गांव
कंतेली गांव को छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा गांव माना जाता है, जहां दशहरे पर रावण दहन नहीं होता। यहां का दशहरा केरल की उस परंपरा से मिलता-जुलता है, जहां राजा बली पाताललोक से बाहर आकर अपनी प्रजा का हालचाल लेते हैं। कंतेली में भी राजा और प्रजा के बीच इसी तरह का संवाद दशकों से कायम है।
44 गांवों की सहभागिता
इस परंपरा में आसपास के 44 गांवों के लोग शामिल होते हैं। जुलूस में नाच-गाना और धार्मिक आयोजन होते हैं। कुल देवी की पूजा के बाद राजमहल में सभा लगती है, जहां ग्रामीण राजा को सोनपत्ती अर्पित कर आशीर्वाद लेते हैं। यह अनोखी परंपरा लोगों में उत्साह और एकजुटता का प्रतीक मानी जाती है।
इतिहास की झलक
कंतेली जमींदारी के प्रथम पुत्र गजराज सिंह ने कुल देवी मंदिर का निर्माण कराया था। स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले 1944 में राजा पोखराज सिंह द्वितीय के निधन के बाद राजमाता पिनांक कुमारी देवी ने यशवंत कुमार सिंह को दत्तक पुत्र बनाया और तब से मंदिर और परंपराओं की जिम्मेदारी उन्हीं के संरक्षण में रही। बाद में मां महामाया समिति का गठन हुआ, जो नवरात्रि और दशहरे के आयोजन संभालती रही।
इस साल नहीं निकलेगी राजा की सवारी
हालांकि इस वर्ष परंपरा में बदलाव देखने को मिलेगा। ट्रस्ट अध्यक्ष अशोक कुमार बड्डगैया और छोटे राजा घनश्याम सिंह ने बताया कि स्वर्गीय गुनेंद कुमार सिंह, जो राजपरिवार के उत्तराधिकारी थे, उनका हाल ही में कार दुर्घटना में निधन हो गया। अभी तक नए उत्तराधिकारी का राजतिलक नहीं हुआ है। इसी कारण इस साल राजा की सवारी नहीं निकाली जाएगी। हालांकि, दशहरे का मेला पूर्ववत लगेगा और लोग परंपरागत आयोजनों में शामिल होंगे।