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शिक्षाकर्मियों को मिला राजनीतिक दलों का सर्मथन

Mon, 17 Dec 2012 02:15 PM IST
रायपुर/इंटरनेट डेस्क
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रायपुर में सप्रे शाला मैदान में शिक्षाकर्मियों के आंदोलन को अब विभिन्न राजनीतिक दलों और जनसंगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है। प्रदर्शनकारियों का हौसला इससे और बढ़ गया है। शिक्षाकर्मियों का कहना है कि वे मांग पूरी करवा कर ही आंदोलन से हटेंगे।
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मालूम हो कि सवंलियन और छठवें वेतनमान की मांग को लेकर राज्य भर के शिक्षाकर्मी तीन दिसंबर से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों को अब एक दर्जन से अधिक संगठनों और संस्थाओं का समर्थन मिल चुका है। जिसमें विधायक व जिला पंचायत, जनपद पंचायत अध्यक्ष, व जनप्रतिनिधि शामिल हैं। समर्थन देने वालों में कांग्रेस पार्टी के नेता, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच, भाकपा माले, टीयूसीआई, अखिल भारतीय किसान सभा, इंडिया अगेंस्ट करप्शन सहित अन्य संगठन शामिल हैं।

आंदोलन के समर्थन में अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य सचिव तेजराम साहू ने कहा है कि भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने पर शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया जाएगा। संविलियन होने से छठवां वेतनमान लागू होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार जल्द इस संबंध फैसला ले।
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शिक्षा कर्मियों की मांग को जायज ठहराते हुए भाकपा (माले) छत्तीसगढ़ राज्य कमेटी ने कहा है कि रमन सरकार समस्या का समाधान करने के बजाय तानाशाही रवैया अपना रही है। पार्टी सरकार द्वारा शिक्षाकर्मियों के निलंबन व बर्खास्तगी की कार्रवाई की निंदा करती है। इसके अलावा राज्य सचिव सौरा यादव ने राज्य के लाखों शिक्षाकर्मियों, किसान, मजदूर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन की मांगों को नजरअंदाज करने वाली सरकार को आगामी चुनाव में उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है।
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