कॉकरोच जनता पार्टी के स्कूली शिक्षा सुधार आंदोलन का असर छत्तीसगढ़ में भी नजर आया है। सरकारी स्कूलों में अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षाओं में शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और बच्चों के सीखने की क्षमता की धरातलीय जांच के लिए राज्य स्तरीय दल का गठन किया है। विभाग ने पहले चरण के अंतर्गत दुर्ग समेत पांच जिलों को इस विशेष जांच अभियान के लिए चुना है। राज्य स्तरीय दल दुर्ग जिले के कम से कम तीन विद्यालयों में पहुंचकर बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण करेगा। निरीक्षण के दौरान दल के सदस्य खुद कक्षाओं में बैठकर शिक्षकों के पढ़ाने की शैली और विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को देखेंगे।
निरीक्षण मुख्य रूप से तीसरी, छठवीं और नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों की विषयगत समझ पर केंद्रित रहेगा। जांच दल गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान तथा अन्य विषयों में बच्चों की समझ और दक्षता की गहराई से परख करेगा। अधिकारी और विषय विशेषज्ञ सीधे बच्चों से बातचीत करके जानने का प्रयास करेंगे कि वे कक्षा में पढ़ाए जा रहे विषय को कितना समझ पा रहे हैं। दल में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ विषय विशेषज्ञ, विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानपाठक और व्याख्याता शामिल हैं।
निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद दल स्कूलों को लाल या हरे रंग के संकेत के जरिए फीडबैक देगा। लाल और हरे रंग के इस संकेत के आधार पर जिला और विकासखंड स्तर के अधिकारी बैठक करके सुधार की कार्ययोजना बनाएंगे। इसके बाद, अधिकारी इस कार्ययोजना को आगे समग्र शिक्षा को भेजेंगे। विभाग ने प्रथम चरण के निरीक्षण कार्यक्रम के लिए दुर्ग के साथ रायपुर, बिलासपुर, महासमुंद और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का चयन किया है।
दुर्ग में शिक्षा के स्तर का सटीक आकलन करने के लिए विभाग ने तीन श्रेणियों के स्कूलों का चयन किया है। इसके तहत जांच दल उच्च प्रदर्शन करने वाले, औसत प्रदर्शन वाले और औसत से कम प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर परखेगा। इससे जिले के सभी स्तरों के सरकारी स्कूलों की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति सामने आ सकेगी। निरीक्षण के दौरान दल केवल अध्यापन शैली ही नहीं देखेगा, बल्कि विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की भी गहन जांच करेगा। विभाग का मुख्य उद्देश्य सुविधाओं के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।