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जशपुर: कुख्यात गौतस्कर के ढाबे का एसएसपी शशि मोहन सिंह ने किया उद्घाटन, जानें क्या है पूरा मामला

Fri, 05 Dec 2025 02:49 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, जशपुर

सार

अमजद हजाम उर्फ बबलू पर गौ-तस्करी के कई मामले दर्ज हैं। थाना लोदाम में तीन मामलों में वह आरोपी था और पिछले आठ महीनों से फरार चल रहा था। पुलिस की सख्त निगरानी और लगातार दबाव के कारण उसने आत्मसमर्पण किया।
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एसएसपी शशि मोहन सिंह ने किया उद्घाटन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लंबे समय से गौ-तस्करी की घटनाओं के लिए बदनाम साईंटांगरटोली गांव में जशपुर पुलिस की पहल का असर दिखाई देने लगा है। “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत चलाए जा रहे लगातार प्रयासों के बीच इसी गांव के कुख्यात गौ-तस्कर अमजद हजाम उर्फ बबलू ने अपराध की दुनिया से हमेशा के लिए बाहर निकलकर एक नई जिंदगी की शुरुआत कर दी है। उसने छत्तीसगढ़–झारखंड सीमा पर अपने नए ढाबे “बबलू शंख ढाबा” की शुरुआत की, जिसका लोकार्पण जशपुर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने किया। एसएसपी ढाबा के पहले ग्राहक बने और चाय पीकर बिल भी चुकाया।

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अमजद हजाम उर्फ बबलू पर गौ-तस्करी के कई मामले दर्ज हैं। थाना लोदाम में तीन मामलों में वह आरोपी था और पिछले आठ महीनों से फरार चल रहा था। पुलिस की सख्त निगरानी और लगातार दबाव के कारण उसने आत्मसमर्पण किया। जेल से बाहर आने के बाद उसकी मुलाकात एसएसपी शशि मोहन सिंह से हुई। एसएसपी ने उसे समझाया कि अपराध का कोई भविष्य नहीं होता और इससे सिर्फ डर, असुरक्षा और जेल ही मिलती है। यदि वह सही रास्ता अपनाए तो सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उसका इंतजार कर रहा है। यह बात अमजद के मन को छू गई और उसने अपराध से दूरी बनाकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

अमजद ने अब एक सम्मानजनक आजीविका अपनाने के लिए अपना ढाबा शुरू किया है। यह क्षेत्र मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यात्रियों की आवाजाही अधिक रहती है, जिससे उसे स्थायी आय की उम्मीद है। ढाबा उद्घाटन कार्यक्रम में ग्रामीण, व्यापारी, पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने अमजद के इस निर्णय का स्वागत किया और उसके नए जीवन की शुभकामनाएं दीं।
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उद्घाटन के दौरान एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि "अपराध कोई विकल्प नहीं है और यदि कोई व्यक्ति सही मार्ग पर लौटना चाहता है तो जशपुर पुलिस उसका पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने ग्रामीणों और युवाओं को संदेश दिया कि गलत रास्तों से दूरी बनाकर मेहनत और ईमानदारी से जीवन जीना ही बेहतर विकल्प है।" उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और समाज मिलकर ऐसे लोगों को नई दिशा दे सकते हैं जो किसी कारणवश अपराध की राह पकड़ लेते हैं।

अमजद ने भी मीडिया से कहा कि "एसएसपी साहब से मुलाकात ने उसकी सोच बदल दी और अब वह ईमानदारी से अपने परिवार का पेट पालना चाहता है।" जशपुर पुलिस की यह पहल जिले में सामाजिक पुनर्वास का एक सफल मॉडल बनकर सामने आई है। एसएसपी ने साफ किया है कि ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे ताकि और भी लोग अपराध छोड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।

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