बच्चे की जांच करती महिला स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
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महिलाओं की एक विशेष ब्रिगेड जिसे महिला कमांडोज कहा जाता है वह छत्तीसगढ़ के गांवों में कोरोना को लेकर जागरुकता फैलाने का काम कर रही हैं। हर सुबह मरून साड़ी, टोपी और फेस मास्क लगाए ये महिलाएं बालोद जिले में स्थित गांवों के अपने घरों से बाहर निकलकर 'कोरोना की जंग, महिला कमांडो के संग, जीतेंगे हम' का नारा लगाती हैं।
यह कमांडो बालोद में शराब और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अपनी लंबी लड़ाई लड़ने की वजह से लोकप्रिय हुई हैं। वह अब लोगों को सामाजिक दूरी और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता पर जागरूक कर रही हैं। कमांडोज का कहना है कि उनकी लगभग हर गांव तक पहुंच है और लोग उनके संदेशों को ध्यान से सुनते हैं।
महिला कमांडो का नेतृत्व करने वाली शमशाद बेगम ने कहा, 'हमने सोचा कि कोरोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक करने में हमारी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है और इसलिए हम महामारी से लड़ने के लिए जिला प्रशासन के साथ काम करने लगे।' जिले के 400 गांवों में 12,500 महिला कमांडो सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि वायरस को लेकर जागरुकता फैलाने के अलावा वे जिला प्रशासन के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंद लोगों को चावल और नकदी प्रदान करने में मदद कर रहे हैं।'
बेगम ने कहा, 'अब तक उन्होंने लॉकडाउन के दौरान राहत उपायों के तहत जिला प्रशासन द्वारा स्थापित अनाज बैंक में 10 क्विंटल चावल का योगदान दिया है। वे हर गांव से पांच हजार रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की नकदी इकट्ठा करते हैं और इसे जिलाधिकारी राहत कोष में जमा कर देते हैं। इसके अलावा, कुछ महिला स्वयंसेविकाएं मास्क सिल रही हैं और उन्हें लोगों और जिला प्रशासन के कर्मचारियों को मुफ्त में वितरित करती हैं।'
शमशाद बेगम को उनके सामाजिक कार्य के लिए भारत सरकार ने साल 2012 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि लगभग 200 महिला कमांडो, जिन्हें स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा 'सुपर पुलिस अधिकारी' (पुलिस के लिए काम करने वाले स्वयंसेवक) के रूप में जाना जाता है, कानून और व्यवस्था की निगरानी में पुलिस की मदद कर रही हैं। राज्य के 12 अन्य जिलों में लगभग 50,000 महिला कमांडो हैं और वे अपने-अपने क्षेत्रों में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भूमिका निभा रही हैं।