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खबर का असर: नक्सली इलाके में तैनात CRPF के लिए मुसीबत बना कलेक्टर का आदेश हुआ वापस

Fri, 26 Jun 2020 02:37 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

25 जून को amarujala.com ने प्रमुखता से यह खबर प्रकाशित की थी। सीआरपीएफ कर्मियों का कहना था कि जिला कलेक्टर ने यह मनमाना आदेश जारी कर जवानों की सुरक्षा को जोखिम में डाल दिया था...
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itbp commandos during operation - फोटो : PTI (File)
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के जिला 'दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा' के कलेक्टर की तरफ से जारी वह आदेश जो सीआरपीएफ के लिए मुसीबत का बन गया था, अब वापस ले लिया गया है। अमर उजाला डॉट कॉम से बात करते हुए रायपुर सेक्टर के सीआरपीएफ आईजी प्रकाश डी. का कहना है कि इस बाबत जिला प्रशासन से बात हो गई है।

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ऐसा कोई आदेश लागू नहीं होगा, जिसके चलते जवानों की सुरक्षा खतरे में पड़ती हो। बाहर से आने वाले बटालियन के सभी अफसरों और जवानों की आरटी-पीसीआर सैंपलिंग जांच अब रायपुर में नहीं होगी।

सभी कर्मी सीधे अपनी बटालियन में पहुंचकर यह जांच करा सकते हैं। उसके बाद संबंधित जिले के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी हिदायतों के अनुसार उन्हें क्वारंटीन सेंटर में भेजा जाएगा।
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एक दिन पहले दंतेवाड़ा के कलेक्टर ने यह आदेश दिया था कि बाहर से आने वाले सीआरपीएफ के सभी कर्मियों को अपनी जांच के लिए राज्य मुख्यालय रायपुर जाना होगा। इसके बाद ही उन्हें जिले में प्रवेश करने दिया जाएगा।
 

25 जून को अमर उजाला डॉट कॉम ने प्रमुखता से यह खबर प्रकाशित की थी। सीआरपीएफ कर्मियों का कहना था कि जिला कलेक्टर ने यह मनमाना आदेश जारी कर जवानों की सुरक्षा को जोखिम में डाल दिया था।

अनेक कर्मी ऐसे भी हैं, जिनके रास्ते में रायपुर नहीं पड़ता। वे वाया जगदलपुर होते हुए दंतेवाड़ा पहुंच जाते हैं। जैसे उड़ीसा, सुकमा और तेलंगाना से आने वाले कर्मियों के लिए तो कलेक्टर का यह आदेश एक तरह से सजा की तरह है।

अलग-अलग समूह में जब ये जवान रायपुर जाएंगे, तो उनका सुरक्षा घेरा टूटने की आशंका बनी रहेगी। सभी जानते हैं कि दंतेवाड़ा इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। दंतेवाड़ा तक पहुंचने के लिए दो ट्रांजिट सेंटर हैं।

एक रायपुर है और दूसरा जगदलपुर। मौजूदा नियम यह था कि छुट्टी, ट्रेनिंग या किसी दूसरे कार्य से बाहर गए कर्मी जब वापस आते हैं, तो वे अपनी बटालियन जांच कराते थे। वहां पर सीआरपीएफ के अनुभवी डॉक्टर होते हैं।

अगर किसी कर्मचारी में कोरोना वायरस से संबंधित कोई लक्षण दिखाई पड़ता, तो उसे जिला अस्पताल या क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया जाता था।
 

जिला कलेक्टर के आदेश के चलते सीआरपीएफ कर्मी खुद को असहज महसूस करने लगे थे। सभी कर्मियों के लिए रायपुर जाना संभव नहीं था। वजह, इसके लिए उन्हें बहुत लंबा सफर तय करना पड़ेगा।

दंतेवाड़ा, जगदलपुर और सुकमा में नक्सलियों ने अपना मजबूत इंटेलिजेंस नेटवर्क बना रखा है। वे जवानों की मूवमेंट पर नजर रखते हैं।
 

रायपुर में कोरोना का टेस्ट कराने के बाद ही सीआरपीएफ कर्मियों को दंतेवाड़ा में प्रवेश करने देना, इस बाबत कर्मियों का कहना था कि यह आदेश मनमाना है। जिन लोगों के रूट में रायपुर है ही नहीं, उस स्थिति वे क्या करेंगे।

अगर उड़ीसा, तेलंगाना वाले जगदलपुर होकर दंतेवाड़ा पहुंचते हैं। उन्हें रायपुर ले जाने के लिए अलग से गाड़ियों और सुरक्षा दस्ते का इंतजाम करना होगा। इतना ही नहीं, रायपुर में एक साथ इतने लोगों को कहां पर ठहराया जाएगा।

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इस आदेश से न केवल जवानों का सुरक्षा घेरा टूटता, बल्कि उन्हें एक बड़ी परेशानी भी झेलनी पड़ती।

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