नरहपुर के आदिमजाति आश्रम में बच्चियों के साथ दुष्कर्म मामले में जांच के दौरान पता चला है कि टीचर सेक्स एजूकेशन के नाम पर बच्चियों से दुष्कर्म करता था। यहां तक की आश्रम के मुख्य द्वार और कमरों में चिटकनी तक नहीं थी। उस पर आश्रम की अधीक्षिका हमेशा गायब ही रहती थीं।
रात होते ही आश्रम में बच्चे अपने कमरों में जाकर सो जाते थे। इसी दौरान अविवाहित शिक्षाकर्मी मन्नूराम गोटी और चौकीदार दीनानाथ नागेश बच्चों के बिस्तर में आकर सारी रात दुष्कर्म करते था, जिसे वह सेक्स एजूकेशन कहते थे।
जांच में पता चला कि वे बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करते समय उन्हें शारीरिक अंगों की भाषा पढ़ाने वाले अंदाज में बताते भी थे। ऐसे में बच्चों ने इसे पढ़ाई के अन्य पीरियड्स की तरह ही लिया और वह अनजाने में इस अत्याचार को सहते रहे। बच्चों के मन में पीड़ा के बावजूद वह सोचते थे कि उन्हें अगले माह परीक्षा के बाद अपने गांव के स्कूल में चले जाना है। इसी कारण आश्रम में वर्षों से बच्चों के साथ चल रहा यह अमानवीय व्यवहार सामने नहीं आया।