छत्तीसगढ़ में बीते नवंबर हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा से करारी शिकस्त खाने के बाद कांग्रेस यहां फिर से अपनी पैठ बनाने के जुगत लगा रही है।
वहीं दूसरी ओर यहां की अखिल भारतीय सतनाम सेना ने कांग्रेस की मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं।
दलित-सतनामी समुदाय की अगुवाई करने वाली सतनाम सेना की छत्तीसगढ़ के बड़े क्षेत्र में खासी पकड़ है। और इस लोकसभा चुनवों के लिए उन्होंने 11 में से 6 सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।
कांग्रेस के खिलाफ कैंपेन
विधानसभा चुनावों में भी आरक्षित सीटों पर लड़ी सतनाम सेना 10 में 9 सीटें भाजापा के खाते में डालने में कामयाब रही थी।
अब लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस के सामने यही डर सता रहा है क्योंकि सतनाम सेना ने अपने 6 क्षेत्रों में बेहद आक्रामक तरीके से अपना प्रचार और कांग्रेस के खिलाफ कैंपेन चला रखा है।
सतनाम सेना ने इस लोकसभा चुनावों के लिए रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कोरबा और चांपा की लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों का दांव लगाया है। ये वो सारे क्षेत्र माने जाते हैं जहां सतनाम सेना की खासी पकड़ है।
कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल
छत्तीसगढ़ में लगभग 12 लाख वोटर ऐसे हैं जो अनुसूचित जातियों से आते हैं। सतनाम सेना पिछले साल ही राज्य की राजनीति में उतरी है।
पिछले साल सतनाम समुदाय के ही एक गुरुबाल दास ने सतनाम सेना के अध्यक्ष के तौर पर अपनी कमान संभाली है।
सतनाम सेना के बनने के कुछ ही महीनों बाद जो खेल बना वह कुछ ऐसा रहा कि ज्यादातर दलित-सतनाम वोट कांग्रेस या किसी भी दूसरी छोटी पार्टी से कट कर सतनाम सेना के हिस्से आ गए।
अब जबकि एक बड़ा वोटर सतनाम सेना के पाले में जा सकता है। इस बात की आशंकाएं लगाई जा रही हैं कि सतनाम सेना इन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुश्किल बनने जा रही है।