परहियाडीह गांव में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन सवालों के घेरे में है। जिस योजना का उद्देश्य गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, उसी योजना में लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री का खेल सामने आया है।
छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज स्थित परहियाडीह गांव में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन सवालों के घेरे में है। जिस योजना का उद्देश्य गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, उसी योजना में लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री का खेल सामने आया है। ग्राम परहियाडीह में क्रेडा विभाग द्वारा सोलर ड्यूल पंप लगाने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए फाउंडेशन निर्माण का काम चल रहा है, लेकिन शुरुआत से ही इसकी गुणवत्ता संदिग्ध नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार घटिया गिट्टी और रेत का इस्तेमाल कर रहे हैं। नतीजा यह है कि कई जगह फाउंडेशन की सतह टूट चुकी है और दीवारों में शुरुआती दरारें साफ दिख रही हैं।
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लोगों ने जब काम सुधारने की मांग की तो ठेकेदारों ने कोई ध्यान नहीं दिया। मजबूरन ग्रामीणों ने जिला पंचायत सभापति बद्री यादव को मौके पर बुलाया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य मानक के अनुरूप ही पूरा होना चाहिए।
लोगों का कहना है कि आखिर ऐसे घटिया काम पर निगरानी क्यों नहीं हो रही? सरकारी योजनाओं का पैसा कौन हजम कर रहा है? ग्रामीणों की साफ मांग है कि निर्माण की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। लोगों का कहना है कि अगर शुरुआत में ही यह हाल है तो आने वाले समय में यह प्रोजेक्ट टिकेगा कैसे? जल जीवन मिशन जैसी अहम योजना में इस तरह की लापरवाही कहीं सरकार की साख को ही चोट न पहुंचा दे।