मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने वनवास के दौरान सबसे ज्यादा समय छत्तीसगढ़ में गुजारा था। इस पुण्य स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार श्रीराम वन गमन पर्यटन परिपथ का निर्माण करके सराहनीय कार्य कर रही है। श्रीराम वन गमन पर्यटन परिपथ में गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में बहने वाली सोन नदी तट पर स्थित तीर्थ स्थान लखन घाट सहित अन्य पौराणिक स्थलों को शामिल नहीं किया गया है। जबकि उनके यहां से गुजरने और रुकने के प्रमाण मौजूद हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार को लखन घाट सहित अन्य चिन्हित स्थलों को श्रीराम वन गमन पर्यटन परिपथ में शामिल किया जाना चाहिए। ये विचार श्रीरामचरितमानस कथा मर्मज्ञ साध्वी भाग्यश्री देवी ने पेंड्रा आगमन के दौरान व्यक्त किये।
साध्वी भाग्यश्री देवी झांसी उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ में श्रीराम वन गमन मार्ग का भ्रमण करते पेंड्रा पहुंची थी। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने सोन नदी के लखन घाट, रामघाट और सीता घाट सहित अन्य पौराणिक स्थान का भ्रमण एवं दर्शन किया। साध्वी भाग्यश्री ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ के हरिचौका से अपनी यात्रा प्रारंभ की है और छत्तीसगढ़ के हिस्से में स्थित राम वन गमन मार्ग का भ्रमण एवं दर्शन करने निकली हैं।
उन्होंने कहा कि यह जानकर बड़ी खुशी हुई कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में वनवासी राम जिन-जिन स्थानों से होकर गुजरे हैं और जहां रुके हैं, उन स्थानों को चिन्हित कर उन्हें विकसित कर रही है। भगवान श्रीराम से जुड़ी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने का यह काम अत्यंत सराहनीय है।
साध्वी भाग्यश्री देवी ने कहा कि श्रीराम वन गमन मार्ग भ्रमण एवं दर्शन करते-करते गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के उत्तर में स्थित लखन घाट जो सोन नदी का प्रमुख घाट है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि श्रीराम वन गमन पर्यटन परिपथ में लखन घाट सहित गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के उन पौराणिक स्थान को भी जोड़ा जाना चाहिए, जहां से वनवासी भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गुजरे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है, ऐसे में भगवान श्रीराम की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने का जो पुण्य कार्य छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार कर रही है,