कोल इंडिया मुख्यालय में गुरुवार को कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकल स्कीम-नन एग्जीक्यूटिव (सीपीआरएमएस-एनई) ट्रस्टी बोर्ड की बैठक हुई। इस बैठक में पेश एक्च्युरी रिपोर्ट में यह बात कहा गया कि सेवानिवृत कोयला कर्मचारियों के इलाज पर आफत है।
रिपोर्ट के अनुसार, सीपीआरएमएस-एनई का फंड जिस रफ्तार से खर्च हो रहा है, वह आने वाले 2031 तक पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। इसे लेकर कोल इंडिया ने चिंता व्यक्त की एवं एक्च्युरी रिपोर्ट के आधार पर प्रबंधन ने अनुदान बढ़ाने की बात रखी, जिसमें यूनियन के सदस्यों ने रिपोर्ट का अध्ययन करने की बात कहते हुए फिलहाल इसे टाल दिया है। यह जानकारी एटक नेता व सीपीआरएमएस-एनई ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य अशोक यादव ने दी।
सीपीआरएमएस-एनआई के माध्यम से सेवानिवृत कोयला कर्मियों को अभी आठ लाख तक आउटडोर इलाज एवं गंभीर रोग में उपचार की पूरी राशि देने की व्यवस्था है। वहीं, अब आउटडोर के लिए कोयला कर्मचारियों को प्रतिवर्ष पति-पत्नी को 25-25 हजार रुपये मिलेगा। इससे पहले कोल इंडिया ने पति-पत्नी को मिलाकर सिर्फ 25 हजार देने का आदेश जारी किया था, जिसे गुरुवार की बैठक में संशोधित कर पति-पत्नी दोनों को 25-25 हजार रुपये देने पर सहमति बनी है।
प्रत्येक वर्ष डेढ़ से दो करोड़ राशि का किया जा रहा भुगतान
कोयला कंपनियों में नई नियुक्ति कम होने और सेवानिवृत कर्मचारियों की संख्या लगातार इजाफा होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। वर्तमान में आठ हजार करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध है। हर साल डेढ़ से दो हजार करोड़ रुपये की निकासी कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भुगतान किया जा रहा है।
कंपनी से 18 हजार का लिया जाता है अंशदान
वन टाइम अनुदान 40 हजार कोयलाकर्मी और कोल इंडिया की ओर से प्रतिकर्मी 18 हजार रुपये दिया जाता है। मौजूदा समय में अनुदान से कई गुना अधिक राशि का भुगतान हो चुका है। कोल इंडिया के निदेशक कार्मिक की अध्यक्षता में कोल इंडिया मुख्यालय में ट्रस्टी बोर्ड की बैठक आहूत की गई थी।