फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीजी: हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कुलसचिव के कमरे में ताला, नहीं कर पाए जॉइन, अवमानना की चेतावनी

Fri, 09 Oct 2026 05:25 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

उच्च न्यायालय से अपने पक्ष में फैसला आने के बाद हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद पर पदभार ग्रहण करने पहुंचे भूपेंद्र कुलदीप को विश्वविद्यालय प्रशासन की उपेक्षा का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कुलसचिव के कमरे में ताला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से अपने पक्ष में फैसला आने के बाद हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद पर पदभार ग्रहण करने पहुंचे भूपेंद्र कुलदीप को विश्वविद्यालय प्रशासन की उपेक्षा का सामना करना पड़ा। उच्च न्यायालय द्वारा शासन का आदेश रद्द किए जाने के बाद शुक्रवार को जब भूपेंद्र कुलदीप विश्वविद्यालय पहुंचे, तो उनके कक्ष में ताला लगा हुआ मिला। विश्वविद्यालय परिसर में न तो कुलपति प्रो. संजय तिवारी उपस्थित थे और न ही प्रभारी कुलसचिव डॉ. अनिल पांडेय मौजूद थे। अपने ही कार्यालय में प्रवेश न मिलने पर कुलसचिव को परिसर में घूमकर और दूसरे कमरों में बैठकर समय बिताना पड़ा। इसके बाद उनके अधिवक्ता ने सोमवार को उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन


उच्च न्यायालय ने रद्द किया सम्बद्ध करने का आदेश
उच्च शिक्षा विभाग ने 29 सितंबर को आदेश जारी करके कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय रायपुर में सम्बद्ध कर दिया था। उनके स्थान पर दुर्ग साइंस कॉलेज के इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भूपेंद्र कुलदीप ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने शासन के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय सेवा नियमों के तहत कुलसचिव का स्थानांतरण एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में किया जा सकता है, लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारी को उच्च शिक्षा संचालनालय में भेजने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।

विभागीय जांच का तर्क अदालत में खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया कि कुलसचिव के विरुद्ध विभागीय जांच लंबित है, इसलिए उन्हें स्थानांतरित करने के बजाय सम्बद्ध किया गया था। हालांकि उच्च न्यायालय ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि विभागीय जांच लंबित होना नियमों से बाहर जाकर आदेश जारी करने का आधार नहीं बन सकता। संचालनालय कोई विश्वविद्यालय नहीं है, इसलिए वहां सम्बद्ध करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए 29 सितंबर के आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि न्यायालय ने शासन को कानून के दायरे में रहकर नया आदेश जारी करने की छूट दी है।
विज्ञापन


सोमवार को अवमानना याचिका की चेतावनी
उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद पदभार ग्रहण न करा पाने पर कुलसचिव के अधिवक्ता शशिकांत चौहान ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा सम्बद्ध करने का आदेश रद्द होते ही भूपेंद्र कुलदीप को पद से दूर रखने का आधार समाप्त हो गया है। कुलसचिव कार्यालय में ताला लगाना और उन्हें पदभार संभालने से रोकना अदालत के आदेश की अवहेलना है। अधिवक्ता ने चेतावनी दी कि यदि कुलसचिव कक्ष का ताला खोलकर उन्हें पदभार ग्रहण नहीं कराया गया, तो वे सोमवार को उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें