फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छत्तीसगढ़: मेडिकल कॉलेजों में 6,300 से ज्यादा पदों पर भर्ती 4 साल से अटकी, रोस्टर के पेंच में फंसी प्रक्रिया

Tue, 06 Oct 2026 01:52 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में पैरामेडिकल व नर्सिंग स्टाफ की भर्ती का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। 6,300 से ज्यादा स्वीकृत पदों पर भर्ती प्रक्रिया करीब चार साल से आरक्षण रोस्टर के पेंच में अटकी है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के 6,300 से ज्यादा स्वीकृत पदों पर सीधी भर्ती चार साल से अटकी पड़ी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आरक्षण का रोस्टर तय नहीं किए जाने के कारण कर्मचारी चयन मंडल (व्यापमं) भर्ती परीक्षा का आयोजन नहीं कर पा रहा है। इस प्रशासनिक देरी के कारण अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं और कार्यरत कर्मचारियों पर काम का बोझ अत्यधिक बढ़ गया है।
विज्ञापन


नए कॉलेजों के जुड़ने से बढ़ी रिक्तियां
प्रदेश में इस वर्ष शुरू हुए पांच नए मेडिकल कॉलेजों के लिए भी पैरामेडिकल तथा नर्सिंग स्टाफ के नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इन नए पदों को जोड़ने के बाद कुल रिक्तियों की संख्या 7,500 के पार पहुंचने का अनुमान है। विभाग के अधिकारी अब तक यह निर्णय नहीं ले पाए हैं कि भर्ती प्रक्रिया में संभाग स्तरीय रोस्टर का पालन करना है या जिला स्तरीय रोस्टर का। चार वर्ष पूर्व शासन की हरी झंडी मिलने के बाद संचालनालय चिकित्सा शिक्षा के प्रस्ताव पर व्यापमं ने सीधी भर्ती परीक्षा आयोजित करने पर सहमति जताई थी। राज्य में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध चिकित्सालयों के लिए यह पहली बार होगा जब व्यापमं के जरिये सीधी भर्ती की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने वर्ष 2022 में प्रदेश के सभी संस्थानों के लिए एक एकीकृत भर्ती योजना बनाई थी, जिसे सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। इसके बावजूद रोस्टर के निर्धारण में हो रहे विलंब से भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में भारी निराशा व्याप्त है।

दैनिक वेतनभोगी नर्सों के सहारे अस्पताल
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के अंतर्गत आने वाले इन पदों पर भर्ती न होने से रायपुर स्थित आंबेडकर अस्पताल समेत राज्य भर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कामकाज प्रभावित हो रहा है। स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने आंबेडकर अस्पताल और अन्य चिकित्सालयों में दैनिक वेतनभोगी आधार पर स्टाफ नर्सों की तैनाती की है, जिन्हें कलेक्टर दर पर भुगतान किया जा रहा है। इसके बाद भी अस्पतालों में 200 से अधिक नर्सों की कमी बनी हुई है। स्टाफ की इस कमी के कारण अक्सर मरीजों के अटेंडेंट और कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थितियां निर्मित हो रही हैं। व्यापमं द्वारा आयोजित होने वाली इस भर्ती परीक्षा के माध्यम से केवल स्टाफ नर्स ही नहीं, बल्कि रेडियोग्राफर, ओटी टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय और आया जैसे अनेक महत्वपूर्ण पदों को भरा जाएगा।
विज्ञापन


आरक्षण रोस्टर के पेंच में उलझी प्रक्रिया
पिछले वर्ष अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में स्थानीय स्तर पर की जा रही भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। अब उस भर्ती को भी व्यापमं के माध्यम से ही कराने का निर्णय लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नियमित और संविदा दोनों प्रकार की नियुक्तियों में आरक्षण रोस्टर का पालन करना अनिवार्य है। इस वजह से संविदा आधार पर भी अस्थायी नियुक्तियां नहीं की जा पा रही हैं। प्रदेश में वर्ष 2022 के आरक्षण ढांचे के तहत कुल 58 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, जिसमें अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के लिए 12 प्रतिशत कोटा निर्धारित है। शासन ने हाल ही में कॉलेजों के लिए 324 और अस्पतालों के लिए 471 पदों यानी कुल 795 पदों की नई प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। कुछ संस्थानों में यह संख्या 825 पदों तक पहुंच सकती है। इस भर्ती के पूर्ण होने से अस्पतालों में पैरामेडिकल तथा नर्सिंग स्टाफ की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी, लेकिन परीक्षा की निश्चित समय-सीमा को लेकर अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें