छत्तीसगढ़ के मंत्री रवींद्र चौबे को राज्य के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। इससे पहले छत्तीसगढ़ के मंत्री टीएस सिंहदेव ने 16 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। सिंह देव ने चार पेज की चिट्ठी के जरिए पंचायती विभाग छोड़ने का एलान किया था। हालांकि, जब सीएम भूपेश बघेल से सिंह देव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक इस्तीफा नहीं मिला है।
चार पन्ने के इस्तीफे के बाद से ही सियासी गलियारे में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। कई लोगों का कहना था कि उन्हें सरकार में दरकिनार किया जा रहा है। हालांकि, वह अन्य चार मंत्रालयों का पदभार संभालते रहेंगे। सिंहदेव ने मुख्यमंत्री को सौंपे चार पन्नों के इस्तीफे में विभाग और सरकार के कामकाज पर असंतोष जाहिर किया था।
सिंहदेव ने कहा था कि मैं पिछले तीन साल से अधिक समय से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के भारसाधक मंत्री के रूप में काम कर रहा हूं। इस दौरान कुछ ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिनसे मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश के आवास विहीन लोगों को मकान बनाकर दिया जाना था, जिसके लिए मैंने कई बार आपसे चर्चा कर राशि आवंटित करने का अनुरोध किया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस कारण राज्य के करीब आठ लाख लोगों के लिए मकान नहीं बन सके। मुझे दुःख है कि इस योजना का लाभ प्रदेश के आवास विहीन लोगों को नहीं मिल सका।
छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ भाजपा का अविश्वास प्रस्ताव
भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ बृहस्पतिवार को विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन विपक्षी दल ने अविश्वास का प्रस्ताव पटल पर रखा। विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने प्रस्ताव को पढ़ा और 27 जुलाई को चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया। 90 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 71 विधायक हैं। भाजपा के 14, जेसीसी (जे) के तीन और बहुजन समाज पार्टी कि सदन में दो सदस्य हैं। नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने बुधवार को कहा था कि भाजपा ने सभी मोर्चों पर विफल रहने वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है।