केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हर दस वर्ष में होने वाली जनगणना उचित समय पर की जाएगी। जब इस पर निर्णय हो जाएगा, तब इसकी घोषणा कर दी जाएगी। जनगणना का हाउस लिस्टिंग चरण और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने की कवायद 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2020 तक पूरे देश में की जानी थी, लेकिन इसे कोरोना के कारण स्थगित कर दिया गया था। कई विपक्षी दल जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि चूंकि इस साल आम चुनाव हुए हैं, इसलिए समय की कमी के कारण जनगणना का काम 2024 में होने की संभावना नहीं है। इस साल के बजट में जनगणना सर्वेक्षण और सांख्यिकी के लिए सिर्फ 1309.46 करोड़ रुपये (2023-24 में 578.29 करोड़ रुपये) आवंटित किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि पूरी जनगणना और एनपीआर की प्रक्रिया पर सरकार को 12,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की संभावना है।
गृहमंत्री अमित शाह इन दिनों छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। यहां वह नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद को लेकर अहम बैठकें कर रहे है। गृहमंत्री ने शनिवार को वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान को और अधिक गति देने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
नवा रायपुर में वामपंथी उग्रवाद और अंतरराज्यीय समन्वय पर एक समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के वित्तपोषण के साथ-साथ नक्सलियों को हथियारों की आपूर्ति भी रोकी जानी चाहिए। बैठक में सात नक्सल प्रभावित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
एक अधिकारी ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद से निपटने की रणनीति, अंतरराज्यीय समन्वय, सुरक्षा बलों का क्षमता निर्माण, नक्सली मामलों की त्वरित जांच और अभियोजन और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक विकास कुछ ऐसे मुद्दे थे जिन पर बैठक के दौरान चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान अब निर्णायक चरण में है और सरकार मार्च 2026 से पहले इस खतरे को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।