छत्तीसगढ़ और झारखंड के नक्सल विरोधी अभियान क्षेत्र में आईईडी विस्फोट और बरामदगी में बढ़ोतरी के बाद अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मार्च 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने की समय सीमा को पूरा करने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा कोर नक्सल इलाकों में जाने के कारण इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बरामदगी और विस्फोटों में वृद्धि देखी गई है।
वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सुरक्षा बल नए शिविर स्थापित कर रहे हैं, खास तौर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के सुदूर जिलों में। माओवादी अब आमने-सामने की मुठभेड़ों में शामिल नहीं हैं, क्योंकि उनके पास हथियार और गोला-बारूद कम है इसलिए वे सैनिकों को मारने या घायल करने के लिए अधिक संख्या में आईईडी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सीआरपीएफ ने जनवरी में बीजापुर में एक पुल के नीचे से पहला आरसीआईईडी बरामद किया था। यह जमीन के नीचे छिपा हुआ 50 किलोग्राम का आरसीआईईडी था। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के स्मार्ट आईईडी का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है। आरसीआईईडी को आईईडी की तुलना में घातक माना जाता है, क्योंकि इसे नक्सलियों द्वारा दूर से ही विस्फोट किया जा सकता है। आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2024 में 78 बड़े आईईडी विस्फोट और बरामदगी हुई, जिसमें आठ सुरक्षाकर्मी चपेट में आए।