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विश्व वानिकी दिवस: CM भूपेश 21 को करेंगे ‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’ का शुभारंभ, यहां भी होंगे कार्यक्रम

Sat, 11 Mar 2023 12:04 PM IST
अभिषेक वर्मा अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस पर ‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’ का शुभारंभ करेंगे। छत्तीसगढ़ में वाणिज्यिक वृक्षारोपण को बढ़ावा देने को राज्य सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना है। प्रत्येक जिले में कार्यक्रम आयोजित होंगे। 
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस पर राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’ का शुभारंभ करेंगे। इसके तहत प्रदेशभर के हर जिले में एक-एक स्थान पर समारोह के रूप में कार्यक्रम का आयोजन होगा। 

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मुख्यमंत्री की और से वाणिज्यिक वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में ‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’ लागू किए जाने की घोषणा के बाद इसके क्रियान्वयन की तैयारियां जोरो पर है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने इस तारतम्य में प्रदेश के समस्त कलेक्टर और वनमंडलाधिकारियों को पत्र भेजकर जिले में ‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’ के शुभारंभ कार्यक्रम के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी सहित आम जनता बड़ी संख्या में शामिल होंगे। 

बता दें कि ‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’ के तहत समस्त वर्ग के सभी इच्छुक भूमिस्वामी, शासकीय अर्द्ध शासकीय एवं शासन की स्वायत्त संस्थाएं, निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, गैर शासकीय संस्थाएं, पंचायतें और भूमि अनुबंध धारक इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत हितग्राही की निजी भूमि में 5 एकड़ तक रोपण के लिए 100 प्रतिशत, 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र में रोपण हेतु 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान शासन की और से हितग्राहियों को प्रदाय किया जाएगा। 

15 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य

राज्य में इस योजना के माध्यम से प्रति वर्ष 36 हजार एकड़ के मान से कुल 5 वर्षों में एक लाख 80 हजार एकड़ में 15 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। शासन की और से चयनित वृक्ष प्रजातियों की खरीदी के लिए प्रतिवर्ष न्यूनतम क्रय मूल्य निर्धारित किया जाएगा।  जिससे कृषकों को निश्चित आय प्राप्त हो सकें। वनक्षेत्र से बाहर लकड़ी के उत्पादन बढ़ने से काष्ठ आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी कृषकों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

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