छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहकों को देश में सबसे अधिक समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। राज्य में तेंदूपत्ता का समर्थन मूल्य 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ ने बताया कि विभाग केवल गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पत्तों की ही खरीदी करता है, जबकि कटे-फटे और खराब गुणवत्ता वाले पत्तों को रिजेक्ट किया जाता है।
संघ के प्रबंध संचालक के अनुसार रिजेक्ट किए गए तेंदूपत्तों पर संग्राहकों का स्वामित्व बना रहता है और वे उन्हें निजी स्तर पर बेच सकते हैं। इसे वैध व्यापारिक प्रक्रिया बताया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि इस तरह के लेन-देन को तस्करी नहीं कहा जा सकता।
विभागीय जानकारी के मुताबिक, 18 मई 2026 तक सुकमा जिले में 84 हजार 382 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 77.84 प्रतिशत है। कोन्टा क्षेत्र की पांच समितियों में लक्ष्य से अधिक संग्रहण दर्ज किया गया है।
राज्यभर में अब तक 11.64 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया है। इस कार्य से 46 हजार 625 संग्राहक जुड़े हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बताए जा रहे हैं। वन विभाग ने ओडिशा सीमा से लगे इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। विभागीय टीमों द्वारा लगातार गश्त और रात्रिकालीन पेट्रोलिंग की जा रही है ताकि अवैध परिवहन पर रोक लगाई जा सके।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरिरास समेत किसी भी फड़ में तेंदूपत्ता खराब होने या दीमक लगने जैसी स्थिति नहीं है। संग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है और संग्राहकों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जा रहा है।