छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग के 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में कटौती करने के फैसले के बाद प्रदेश में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने अपनी सुरक्षा Z+ से घटाकर Z श्रेणी किए जाने पर राज्य सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में कटौती करने से पहले सरकार को मौजूदा परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए।
बस्तर में नक्सलवाद की स्थिति पर उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सली खतरे की आशंका अभी भी बनी हुई है। उनके अनुसार, बस्तर में अभी करीब एक दर्जन नक्सली बचे हुए हैं, जबकि कुछ अन्य नक्सली दबाव के कारण दूसरे प्रदेशों में चले गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नक्सलवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, तो नेताओं की सुरक्षा घटाने में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने सरकार से सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करने की मांग की।
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सुरक्षा समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग
दीपक बैज ने कहा कि सरकार को नेताओं की सुरक्षा घटाने से पहले मौजूदा परिस्थितियों का एक बार फिर आकलन करना चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था में कटौती का फैसला सोच-समझकर लिया जाना चाहिए। पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार नेताओं की सुरक्षा कम कर रही है, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उसे स्वयं लेनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।