मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब छत्तीसगढ़ के निर्माण सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। निर्माण सामग्रियों की कीमतों में अचानक हुई तेज बढ़ोतरी से सरकारी और निजी प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब छत्तीसगढ़ के निर्माण सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। निर्माण सामग्रियों की कीमतों में अचानक हुई तेज बढ़ोतरी से सरकारी और निजी प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, प्रदेश में करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य इसकी चपेट में आ गए हैं।
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एसोसिएशन का कहना है कि युद्ध के बाद ईंधन, स्टील, बिटुमिन और सीमेंट जैसे जरूरी संसाधनों की कीमतों में असामान्य उछाल आया है। इससे निर्माण लागत तेजी से बढ़ गई है और ठेकेदारों के लिए तय समय पर काम पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है।
सबसे ज्यादा असर सीमेंट की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। ओपीसी और पीपीसी सीमेंट के दामों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो अब 340 रुपये प्रति बैग तक पहुंच गए हैं। पहले यही कीमत करीब 260 रुपये थी।
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ठेकेदारों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद सरकारी अनुबंधों में राहत का प्रावधान बेहद सीमित है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। एसोसिएशन ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से राहत पैकेज की मांग की है।