छत्तीसगढ़ में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ले ली है। बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ ओलावृष्टि दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। वहीं मौसम विभाग ने 19 मार्च के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और वज्रपात हो सकता है।
मौसम में इस बदलाव के पीछे सक्रिय दो प्रमुख प्रणालियां मानी जा रही हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश के मध्य भाग में समुद्र तल से लगभग 0.9 किलोमीटर ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके साथ ही दक्षिण-पूर्वी राजस्थान से मध्य प्रदेश होते हुए उत्तरी छत्तीसगढ़ तक एक द्रोणिका फैली हुई है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींचकर ला रही है। इसी कारण प्रदेश में बादल तेजी से बन रहे हैं और बारिश के साथ ओले गिरने की स्थिति बन रही है।
गुरुवार को भी मौसम का असर जारी रहने की संभावना है। राजधानी रायपुर में आकाश आंशिक रूप से मेघमय रहेगा और कहीं-कहीं हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ सकते हैं। दिन का अधिकतम तापमान लगभग 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
इस बदलाव का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में अगले चार से पांच दिनों तक अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट बनी रहने की संभावना है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से फिलहाल राहत मिलेगी, हालांकि मौसम के साफ होते ही तापमान में फिर धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।
बुधवार को दर्ज तापमान पर नजर डालें तो दुर्ग प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री रहा, जो सामान्य से 2.2 डिग्री कम है। बिलासपुर में 33.3 डिग्री, जगदलपुर में 30.7 डिग्री, अंबिकापुर में 31.7 डिग्री और माना एयरपोर्ट में 33.5 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां आंधी, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहना और सुरक्षित जगह पर शरण लेना जरूरी है। किसानों के लिए भी यह समय सतर्क रहने का है, क्योंकि ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।