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रायपुर: 10 हजार से ज्यादा युवाओं की 'आरक्षण बचाओ रैली', राज्यपाल के नाम सौंपा 20 सूत्रीय ज्ञापन

Sun, 20 Sep 2026 07:12 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

जेन-जी युवाओं के नेतृत्व में 'संवैधानिक आरक्षण बचाओ रैली' निकाली गई। अंबेडकर चौक से शुरू हुई रैली में प्रदेशभर से आए 10 हजार से अधिक युवा, विद्यार्थी और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए। 
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युवाओं की 'आरक्षण बचाओ रैली' - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ में संवैधानिक आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर रविवार को राजधानी रायपुर में बड़ी संख्या में युवाओं ने रैली निकाली। जेन-जी युवा वर्ग के नेतृत्व में आयोजित 'संवैधानिक आरक्षण बचाओ रैली' में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए 10 हजार से अधिक युवा, विद्यार्थी, कर्मचारी और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

 

रैली अंबेडकर चौक से शुरू होकर निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ी। इस दौरान प्रतिभागियों ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग उठाई। रैली के बाद राज्यपाल के नाम 20 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया।

 

ज्ञापन में एससी और एसटी वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े नियम-5 को दोबारा अधिसूचित कर लागू करने की मांग की गई है। इसके साथ ही बिना आरक्षण रोस्टर के होने वाली पदोन्नतियों पर रोक लगाने और विभागों में आरक्षण रोस्टर को नियमित रूप से अपडेट करने की मांग रखी गई।

 

प्रदर्शनकारियों ने राज्य गठन से अब तक लंबित बैकलॉग पदों का आंकड़ा सार्वजनिक करने और विशेष भर्ती अभियान चलाकर एससी, एसटी और ओबीसी के रिक्त पदों को भरने की मांग भी की।

 

रैली में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत और एससी वर्ग के लिए 13 प्रतिशत आरक्षण की मांग उठाई गई। आयोजकों ने प्लेसमेंट, आउटसोर्सिंग और संविदा भर्ती जैसी व्यवस्थाओं में भी सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात कही। ज्ञापन में संविदा, आउटसोर्स और प्लेसमेंट कर्मचारियों के नियमितीकरण से पहले सामाजिक प्रतिनिधित्व का परीक्षण करने की मांग भी शामिल है।

 

रैली में एससी उपयोजना (एससीएसपी) और जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) के बजट के संरक्षण और पारदर्शी इस्तेमाल की मांग की गई। युवाओं ने इन निधियों का एक हिस्सा एससी-एसटी युवाओं के स्वरोजगार, कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रमों के लिए निर्धारित करने की मांग रखी।

 

इसके अलावा पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिकार देने की मांग भी की गई।

 

ज्ञापन में एससी, एसटी और ओबीसी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति बढ़ाने तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में सामाजिक न्याय से जुड़ी शिकायतों के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई।

 

इसके साथ ही सरकारी आयोगों, बोर्डों और नीति-निर्माण संस्थाओं में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने तथा निजी उद्योगों और संस्थानों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार में प्रतिनिधित्व की मांग उठाई गई।

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आयोजकों ने कहा कि कुछ प्रमुख मांगों पर एक महीने के भीतर, जबकि अन्य मांगों पर तीन महीने के भीतर कार्रवाई की जानकारी देने का अनुरोध किया गया है। निर्धारित समय में ठोस कार्रवाई नहीं होने पर राज्यव्यापी जनजागरण अभियान चलाने और आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र से पहले बड़े स्तर पर ‘आरक्षण बचाओ अभियान’ आयोजित करने की बात कही गई है।

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