रायपुर में दिव्यांगजनों की सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहां प्रदेश का पहला दिव्यांग गैरेज ‘संबल’ शुरू किया गया है, जहां दिव्यांगजनों के उपयोग में आने वाले उपकरणों की निःशुल्क मरम्मत की जा रही है।
रायपुर में दिव्यांगजनों की सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहां प्रदेश का पहला दिव्यांग गैरेज ‘संबल’ शुरू किया गया है, जहां दिव्यांगजनों के उपयोग में आने वाले उपकरणों की निःशुल्क मरम्मत की जा रही है। खास बात यह है कि इस केंद्र का संचालन भी दिव्यांगजन ही कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 1 अक्टूबर को इसकी घोषणा की थी और 3 दिसंबर को इसका शुभारंभ कर दिया गया। जिला प्रशासन की पहल पर नगर निगम की जर्जर पुरानी इमारत का नवीनीकरण कर इसे आधुनिक स्वरूप दिया गया है।
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कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस केंद्र में मोटराइज्ड ट्राइसिकल, हस्तचलित ट्राइसिकल, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, चश्मा तथा अन्य सहायक उपकरणों की मरम्मत की सुविधा उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर पुर्जों का प्रतिस्थापन भी किया जाता है। जल्द ही यहां कृत्रिम अंग निर्माण की मशीन लगाने की तैयारी है।
केंद्र में कार्यरत कुलदीप मिंज, जो 90 प्रतिशत दिव्यांग हैं, उपकरणों की मरम्मत का कार्य संभाल रहे हैं। एक दुर्घटना में दोनों पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने कृत्रिम पैरों के सहारे न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अब अन्य दिव्यांगजनों की मदद भी कर रहे हैं। वहीं 80 प्रतिशत दिव्यांग चंद्रपाल मानिकपुरी डाटा एंट्री का दायित्व निभा रहे हैं और केंद्र में आने वाले लोगों की समस्याओं का पंजीकरण करते हैं।
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इस पहल से लाभान्वित दिव्यांगजनों ने बताया कि पहले ट्राइसिकल या अन्य उपकरण खराब होने पर उन्हें भटकना पड़ता था और महंगे दाम पर मरम्मत करानी पड़ती थी। अब ‘संबल’ केंद्र में निःशुल्क और सुलभ सेवा मिलने से बड़ी राहत मिली है।