कोल ब्लॉक के सर्वे के लिए पहुंची राजस्व टीम को ग्रामीणों ने भगाया।
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में गुरुवार को एसईसीएल को तमनार क्षेत्र में आवंटित कोल ब्लॉक के सर्वे के लिए पहुंची राजस्व टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने गांव में घुसने से पहले ही टीम को दौड़ा लिया। इसके चलते टीम प्रवेश द्वार से ही वापस लौट गई। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव पांचवीं अनुसूची में हैं। ग्राम सभा ने पहले ही कोल ब्लॉक की अनुमति नहीं दी है, फिर सर्वेक्षण का काम कैसे किया जा सकता है। वहीं राजस्व विभाग का कहना है कि भू अर्जन पहले ही हो चुका है।
गारे पेलमा सेक्टर-1 में 2010 से एसईसीएल की कोल ब्लॉक की डींगे है। इससे लालपुर उरवा, पेलमा, सक्ता, जरहीडीह सहित 14 गांव प्रभावित है। प्रभावित गांव के लोग तब से ही कोल ब्लॉक का विरोध कर रहे हैं। इसके लिए कोयला सत्याग्रह भी चलाया जा रहा है। इसी बीच गुरुवार को एसडीएम के आदेश पर राजस्व विभाग का अमला नायाब तहसीलदार के नेतृत्व में 8-10 पटवारी व आरआई की टीम गांव में परिसमत्तियो के मूल्यांकन के लिए पहुंची। राजस्व अमला के आने की खबर मिली तो ग्रामीण एकत्रित हो गए।
लालपुर गांव के प्रवेश द्वार पर ही राजस्व की टीम को ग्रामीणों ने रोक लिया। नायाब तहसीदार ने ग्रामीणों को बताया कि परिसमत्तियो का मूल्यांकन करना है तो ग्रामीणों ने सवाल किया कि यह क्षेत्र 5वीं अनुसूची में है। ऐसे में किसकी अनुमति से आए हैं। इस पर राजस्व टीम और ग्रामीणों के बीच काफी बहस हुई। राजस्व टीम का कहना है साल 2010 में भू अर्जन हो चुका है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि धारा 4 के प्रकाशन के बाद आगे कुछ नहीं हुआ। तहसीलदार के आदेश में लिखा है कि भू-अर्जन पूर्व में हो चुका है तो फिर परिसमत्तियो का मूल्यांकन कैसे, वह तो पहले होना चाहिए।
अडानी से किया है समझौता
कुछ दिन पहले ही एसईसीएल कोयला खनन का समझौता अदानी से 22 सालों के लिए किया है। जिसके विरोध में 20 फरवरी 2023 से पेलमा गांव से तीन दिवसीय पदयात्रा निकाली गई। विरोध के बाद कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसे लेकर उनमें आक्रोश है।