नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी अकील साय को दोषी ठहराते हुए प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और पीड़िता को 7 लाख रुपये सहायता दिलाने की अनुशंसा की है।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सहेली के साथ शादी घर जा रही नाबालिग को जंगल ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को अदालत में अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और जुर्माने से दंडित किया है।
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मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि धरमजयगढ़ थाने में पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट लिखाते हुए बताया था कि 14 दिसंबर की शाम उसकी नाबालिग बेटी अपने सहेली के साथ गांव में आयोजित शादी घर जा रही थी। इस दौरान आरोपी अकील साय पहाड़ी कोरवा, रास्ते में उसे खींच कर जंगल ले गया और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाया।
इस घटना के बाद पीड़िता अपने घर पहुंची और उसने अपने पिता को घटना की जानकारी दी। जिसके बाद पीड़िता की हालत खराब होने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता के पिता की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी ने आरोपी के खिलाफ धारा 376 भारतीय दण्ड संहिता एवं धारा 4, 6 पाक्सो एक्ट के तहत न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था।
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इस मामले में विशेष न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश श्रीमान शहाबुद्दीन कुरैशी ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी साक्षियों के बयान दर्ज कराया तथा उभय पक्ष के तर्क श्रवण करने के पश्चात आरोपी अकिल साय कोरवा को उपरोक्त धाराओं का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन काल तक) की सजा सुनाई तथा 5 हजार रुपए के अर्थ दण्ड से दण्डित किया। साथ ही पीड़िता को विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से 7 लाख रुपए दिलाये जाने की अनुशंसा की गई है। इस मामले में विशेष लोक अभियोजक श्रीमती अर्चना मिश्रा ने प्रभावी ढंग से पैरवी की।