छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग के अध्यक्ष और लोक संगीत एवं कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. योगेंद्र चौबे को एक छात्रा से छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
पीड़ित छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रो. डॉ. योगेंद्र चौबे ने स्नातक परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने का लालच देकर उसके साथ अश्लील व्यवहार और छेड़छाड़ की। छात्रा के मुताबिक, प्रोफेसर ने उसे मोबाइल पर आपत्तिजनक मैसेज और रील्स भेजकर मिलने का दबाव बनाया। शुरू में रिजल्ट खराब होने के डर से छात्रा ने इन हरकतों को नजरअंदाज किया, लेकिन जब उत्पीड़न असहनीय हो गया, तो उसने अपने परिजनों और दोस्तों से इसकी चर्चा की। इसके बाद उसने विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर उसने राष्ट्रीय महिला आयोग से संपर्क किया।
राष्ट्रीय महिला आयोग के निर्देश पर खैरागढ़ पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। शनिवार 29 मार्च 2025 की शाम को प्रो. चौबे को थाने में तलब किया गया और रातभर पूछताछ के बाद उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। रविवार को राजनांदगांव की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने प्रो. चौबे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354(क), 354(ख), 509, 506 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v)(क) के तहत मामला दर्ज किया है। सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर अब हाईकोर्ट में जमानत के लिए अपील कर सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहने के कारण प्रो. चौबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
कुलपति सत्य नारायण राठौर ने निलंबन का आदेश जारी करते हुए कहा कि नियमानुसार यह कदम उठाया गया है। यह घटना विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा पर एक और धब्बा बन गई है, जो पहले भी दुर्व्यवहार और छेड़छाड़ के मामलों को लेकर सुर्खियों में रह चुका है। छात्राओं की सुरक्षा और गरिमा को लेकर उठे सवालों के बीच अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले और विश्वविद्यालय प्रशासन के भविष्य के कदमों पर टिकी हैं।