अपने बेटे नाथु, उसकी पत्नी और चार बच्चों के साथ रतली बाई दो कमरों की एक छोटी सी झोपड़ी में रहती हैं। जहां उनके पास महज एक जोड़ी चप्पल हैं। यह चप्पल रतली बाई की पहली चप्पले हैं। इसके बाद भी वह 10 किलोमीटर नंगे पैर चलकर बीज आदि खरीदने गईं क्योंकि चप्पलें तो घर के एक कोने में रखी हैं। उनका कहना है कि सब उनसे कहते हैं कि वह चप्पलों को बचाकर रखें, अगर वह चप्पल पहनकर मिट्टी या पानी में जाएंगी तो वह खराब हो जाएंगी। उनका कहना है कि उनके परिवार में से किसी को पहली बार चप्पलें दी गई हैं। जबकि तेंदु पत्ता समिति के प्रबंधक का कहना है कि यह असंभव है, यह योजना तो 2005 से ही शुरू हो चुकी है।
इसके बाद पीएम की रतलीबाई को चप्पल पहनाते हुए फोटो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। जिसमें बीजेपी का कहना था कि पीएम ने एक गरीब महिला के प्रति अपनी संवेदनशीलता और सम्मान प्रकट किया है। जबकि विपक्ष का कहना है कि बीजेपी सरकार के 15 साल बाद भी रतली बाई सिर्फ एक चप्पल का सपना देख रही हैं। रतली बाई से पूछा गया कि वह पीएम से और क्या चाहती हैं तो उसने कहा कि पीएम सबको गैस कनेक्शन दे रहे हैं, तो वह अब चूल्हे पर खाना बनाना नहीं चाहती हैं।