राष्ट्रपति मुर्मू और राज्यपाल हरिचंदन ने किया पौधरोपण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने आज राजभवन परिसर में पौधरोपण किया। मुर्मू ने पारिजात का पौधा लगाया और हरिचंदन ने श्वेत चम्पा का पौधा लगाया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपनी बेटी इतिश्री के साथ रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय पहुंचीं। यहां संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति यहां के संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक वैभव से रूबरू हुईं और यहां की ऐतिहासिक पृष्टभूमि से जुड़ी पुरातन एवं संग्रहणीय वस्तुओं का अवलोकन किया। आदिवासी संस्कृति और आधुनिक शिल्प से संबंधित सामग्रियां के बारे में भी जानकारी ली। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी राष्ट्रपति के साथ संग्रहालय का अवलोकन किया।
राष्ट्रपति के संबोधन की अहम बातें
राज्यपाल के संबोधन की अहम बातें
सीएम भूपेश बोले- ऐसा लग रहा है कोई अपने घर का आया
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विवि के कार्यक्रम में कहा कि ऐसा लगा जैसे कोई अपना, अपने ही घर आया है। राष्ट्रपति का आगमन छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए बहुत गौरवका क्षण है। उनकी इस यात्रा के लिए मैं छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ नागरिकों की ओर से आपको बहुत धन्यवाद देता हूं। आज राष्ट्रपति, पूरे देश की मुखिया के आगमन से हम छत्तीसगढ़ के लोग विशेष आत्मीयता का अनुभव कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे कोई अपना, अपने ही घर आया है। यह प्रदेश एक आदिवासी प्रदेश है, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग भी बहुत बड़ी संख्या में यहां निवास करते हैं। यह प्रदेश किसानों का प्रदेश है, यह वंचितों का प्रदेश है। सभी वंचितों को न्याय मिले, यह संविधान की भावना है।
उन्होंने कहा कि आप संविधान की रक्षक हैं, आपके आगमन से छत्तीसगढ़ के लोग बहुत सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की बहुत लंबी सीमा ओडिशा से लगती है, इसलिए उत्कल संस्कृति के साथ हमारी सबसे अधिक साझेदारी है। हमारा रहन-सहन, खान-पान, आचार-विचार सबकुछ एक जैसा है। यहां तक की हमारा संघर्ष भी ओडिशा के वंचितों के संघर्ष जैसा ही है। यह बड़ा ही शुभअवसर है। रक्षाबंधन का समय है। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सकारात्मक परिवर्तन वर्ष का आज शुभारंभ भी हो रहा है। सामाजिक और आध्यात्मिक परिवर्तन की दिशा में इस संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों में यथासंभव भागीदार बनने के लिए प्रयत्नशील रहता हूं। छत्तीसगढ़ प्रदेश की नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों के संचालन में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का आध्यात्मिक मार्गदर्शन हमें मिलता रहा है। मैं इसके लिए इस मंच से आभार व्यक्त करता हूं।