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नक्सली की शादी में बाराती बने आईजी-डीआईजी

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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को मुख्य धारा में लाने और उनमें शासन प्रशासन के प्रति विश्वास पैदा करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक साहसिक और काबिले तारीफ कदम उठाया है।
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पुलिस ने बंदूक छोड़कर सरेंडर करने वाले पूर्व नक्सली जोड़े की धूमधाम से शादी करवाई। खास बात ये रही कि शादी का सारा इंतजाम पुलिस और एक सामाजिक संगठन की ओर से किया गया और आईजी डीआईजी से लेकर तमाम अधिकारी बाराती बनकर शादी में शरीक हुए।

छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित बस्तर रीजन के जगदलपुर इलाके में शनिवार शाम उत्सव सा माहौल रहा। मौका था पूर्व नक्सली डिप्टी कमांडर लक्ष्मण और 22 साल की पूर्व महिला नक्सली कोसी की शादी का।
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आम शादियों की तरह इस शादी में भी मेहंदी, हल्दी, तिलक और नाच गाना जैसे तमाम वैवाहिक आयोजनों को पूरी भव्यता के साथ अंजाम दिया गया। शादी में लगभग 5 हजार के करीब लोग शामिल हुए।

पुलिसकर्मी बने बाराती, एनजीओ ने संभाला वधु पक्ष का जिम्मा

जिसमें दुल्हा दुल्हन के परिवार, स्‍थानीय लोगों के अलावा तमाम पुलिस अधिकारी और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए। छत्तीसगढ़ पुलिस आर्म्ड फोर्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लंबी चौड़ी बारात की शुरूआत पुलिस कोतवाली से हुई जिसमें पुलिस बैंड के साथ समस्त बाराती नाचते गाते हाटा मैदान में वैवाहिक स्‍थल तक पहुंचे।

वैसे पुलिस दुल्हा पक्ष की ओर से शादी में शामिल हुई तो एक एनजीओ ने वधु पक्ष की ओर से बारात के स्वागत और तैयारियों का जिम्मा संभला। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार बस्तर एसपी आरएन दास ने बताया कि पूर्व नक्सली जोड़ के बीच यह पहली नजर का प्यार था उस दौरान दोनों नक्सली के तौर पर ही काम करते थे। लेकिन एक दूसरे का साथ निभाने के लिए दोनों ने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया।

पुलिस ने भी इस मौके को सामाजिक सौहार्द्र के तौर पर स्‍थापित करने के लिए दोनों की शादी का जिम्मा उठाने में देर नहीं की। पुलिस के अनुसार इससे अन्‍य नक्सलियों को भी हथियार छोड़कर मुख्य धारा में शामिल होने और एक बेहतर समाज बनाने की प्रेरणा मिल सकेगी।
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पूर्व नक्सली जोड़े को पुलिस में मिली नौकरी

शादी में बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी ने कन्यादान की रस्म निभाई और पुलिस की ओर से दुल्हा दुल्हन के वैवाहिक जीवन में प्रयोग होने वाले सामान की व्यवस्‍था की गई।

बता दें कि 22 साल की कोसी पूर्व में नक्सलियों की दर्भा डिविजन कमेटी में प्लाटून कमांडर रही है। इस दौरान उसने झीरम घाटी में मई 2013 में कांग्रेस नेताओं पर हुए हमले में भी भाग लिया। जबकि 24 साल का लक्ष्मण इंद्रावती एरिया कमेटी में डिप्टी कमांडर रहा है। लक्ष्मण ने साल 2014 में ही हथियार डाल दिए थे जबकि कोसी ने बीते साल ही आम्समर्पण किया।

आत्मसमर्पण के बाद कोसी और लक्ष्मण अब जिला पुलिस बल में आरक्षक के रूप में कार्य करेंगे, राज्य शासन द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी देने का प्रावधान है। दोनों की योग्यता के मुताबिक उन्हें आरक्षक पद पर नौकरी दी गई है।
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