ड्रेस प्लास्टिक बैग में, बीमार को खाट पर
यहां के ग्रामीण संदीप टोप्पो ने बताया कि बरसात के समय बीमारों को खाट में लादकर दो किलोमीटर दूर पक्की सड़क तक ले जाना पड़ता है। बच्चे स्कूल के कपड़े प्लास्टिक के बैग में रखकर कुनकुरी पहुंचते हैं। फिर वहां कपड़े बदलकर स्कूल जाते हैं।
सरकारी योजनाएं अधूरी, पानी की भी किल्लत
मोनिका टोप्पो बताती हैं कि बोडराबांध में न केवल सड़क और पुल की कमी है, बल्कि पानी की भी गंभीर समस्या है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई लोगों के घर अधूरे रह गए हैं, क्योंकि सामान लाने का साधन ही नहीं है। मोनिका खुद पीएम आवास निर्माण की शुरुआत भी नहीं कर सकी हैं।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से जवाबदेही की मांग
बोडराबांध की यह स्थिति ना केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या विकास का लाभ हर गांव तक सच में पहुंच पाया है? अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री तक पहुँची यह गुहार क्या रंग लाती है या बोडराबांध के लोग आगे भी जुगाड़ के पुल से जिंदगी की नदी पार करते रहेंगे।