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भाजपा नेता के एलान के बाद भड़का छत्तीसगढ़ का पत्थलगड़ी आंदोलन, सरकार का फैसला बना बड़ी वजह

Sun, 29 Apr 2018 03:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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छत्तीसगढ़ में पत्थलगड़ी आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। 22 अप्रैल से शुरू हुआ यह आंदोलन शनिवार को भाजपा की सद्भावना यात्रा के बाद और भड़क गया जब महिला नेता ने मंच से एलान किया कि वह पत्थलगड़ी तोड़ेंगे। जिसके बाद यात्रा में शामिल सभी लोगों ने पत्थलगड़ी तोड़ना शरू कर दिया। दरअसल इस आंदोलन के पीछे की वजह है सरकार द्वार 10 अप्रैल को जशपुर जिले को नक्सल मुक्त घोषित करना। 

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आंदोलन के तहत आदिवासियों ने बटुंगा, बच्छरांव और सिहारडांड गांव में खुद की सत्ता वाले पत्थर लगा लिए हैं और प्रशासन और बाहरी लोगों के आने पर रोक लगा दी है। वहीं सद्भावना यात्रा में मौजूद लोग और नेता तो कार्यक्रम खत्म होते ही निकल गए लेकिन वहां 4 अधिकारी और 15 पुलिसकर्मी फंस गए। उनसे गांव के लोग पूछने लगे कि वह पत्थलगड़ी तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसी बीच कुछ लोग तेज स्वर में बोलने लगे कि उनके पत्थलगड़ी को क्यों तोड़े गए और पुलिस व अधिकारियों ने ऐसे लोगों को क्यों नहीं रोका। यह घटना शाम करीब 6 बजे की है।

इसके बाद रात 8.20 पर प्रशासन को सूचना मिली कि अधिकारी और पुलिसकर्मी फंस गए हैं। इस बात ने प्रशासन को सकते में डाल दिया। मामले की जानकारी मिलते ही खुद डीजीपी माौके पर पहुंचे। फिर आधी रात को एसडीएम हितेश कुमार बघेल ने सब ठीक होने की सूचना दी तो प्रशासन ने राहत की सांस ली। बता दें एसडीएम बघेल भी उन अधिकारियों में शामिल थे जिन्हें बंधक बनाया गया था। 

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हक, रोजगार और शोषण के खिलाफ लड़ाई

यहां के लोगों का कहना है कि उनकी लड़ाई सरकार के साथ नहीं बल्कि हक, रोजगार और शोषण के खिलाफ है। उनका कहना है कि बस जो भी गांव में आए उनकी इजाजद से ही आए और गांव में ग्राम सभा ही सर्वोच्च रहेगी व सारे फैसले लेगी। लोगों का कहना है कि बच्छरांव गांव में 22 अप्रैल को पत्थगड़ी लगाई गई थी और अगले छह महीनों में आधा दर्जन से भी ज्यादा पत्थलगड़ी लग जाएगी। इससे यह साफ प्रतीत होता है कि आंदोलन सुनियोजित तरीके से चल रहा है। लेकिन जब लोगों से पूछा गया कि यह सब तैयारी कौन करवा रहा है तो इस पर वह खामोश हो गए।

लोगों का कहना है कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। उनके गांव के घरों में केवल एक बल्ब जलता है। इसके अलावा वहां टीवी वगैरह कुछ भी नहीं है। लोगों ने बताया कि उनके पीने के लिए पानी नहीं है, हर साल सूखा पड़ जाता है, तालाब खुदाई और सड़क बनाने का काम बंद पड़ा है। इसके अलावा साल 2013 से रोजगार गारंटी का पैसा भी नहीं मिला है। वहीं दस साल से गांव वाले पुल की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक उसकी योजना भी नहीं बनी है। लोगों ने बताया कि सिहारडांड के साथ कलिया गांव में भी अभी तक बिजली नहीं आई है। 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का कहना है कि अगर जशपुर में प्रजातांत्रिक और धार्मिक तरीके से सब हो रहा है तो ठीक है लेकिन अगर गैरकानूनी तरीके से कुछ किया जाएगा तो कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्य संवैधानिक तरीके से होते हैं और विकास की राह में किसी को बाधा नहीं पहुंचानी चाहिए। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के फ्लॉप विकास मॉडल की ही देन है पत्थलगड़ी। उन्होंने कहा कि पत्थगड़ी आंदोलन आदिवासियों के शोषण और दमन के खिलाफ जनआक्रोश है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जानकारी होनी चाहिए कि यह मामला धार्मिक है या नहीं और अगर मगर नहीं करना चाहिए।  
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