छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। जिला अस्पताल पंडरी रायपुर और जिला अस्पताल बलौदाबाजार की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) के तहत राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। पंडरी की IPHL देश की पहली लैब बनी है जिसे यह सम्मान मिला, जबकि बलौदाबाजार IPHL देश की दूसरी प्रमाणित लैब घोषित की गई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र में वैज्ञानिक और संरचनात्मक सुधारों की दिशा में उठाए गए कदमों को मजबूती प्रदान करती है।
भारत सरकार द्वारा नामित विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं ने सितंबर 2025 में दोनों लैब्स का व्यापक निरीक्षण किया था। मूल्यांकन के दौरान मरीज केंद्रित सेवाएं, तकनीकी गुणवत्ता, सुरक्षा प्रोटोकॉल, साफ-सफाई, समयबद्ध रिपोर्टिंग, रिकॉर्ड प्रबंधन और बायो–मेडिकल वेस्ट प्रबंधन जैसे सभी मानकों की जांच की गई। मूल्यांकन के बाद पंडरी IPHL को 90 प्रतिशत और बलौदाबाजार IPHL को 88 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए, जो राष्ट्रीय मानकों के अनुसार उत्कृष्ट श्रेणी माने जाते हैं। प्रमाणन प्राप्त करने के साथ ही दोनों लैब अब देशभर में चल रहे IPHL नेटवर्क के लिए मॉडल के रूप में उभर कर सामने आई हैं।
इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की अवधारणा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को एक ही स्थान पर बायोकैमिस्ट्री, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित सभी प्रमुख जांच सुविधाएं मिलें। पंडरी रायपुर IPHL में प्रतिदिन तीन हजार से अधिक जांचें होती हैं और 120 से अधिक प्रकार की सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे यह पूरे राज्य के लिए एक ‘मॉडल लैब’ बन चुकी है। बलौदाबाजार IPHL में भी प्रतिदिन एक हजार से अधिक सैंपलों की जांच होती है, जिसके कारण जिले के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को महंगी निजी लैब पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक प्रदेश की 832 स्वास्थ्य संस्थाओं का राष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्यांकन और प्रमाणीकरण किया जा चुका है। इसमें दंतेवाड़ा जिले के चिंतागुफा जैसे दुर्गम क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं। देश में पहली बार किसी राज्य ने इतने बड़े पैमाने पर लैबों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करवाया है। भारत सरकार द्वारा जारी IPHL गाइडलाइन के मुख्य पृष्ठ पर रायपुर IPHL की तस्वीर प्रकाशित की गई है, जो इसकी गुणवत्ता और राष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।
NQAS के मानकों का पालन केवल दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य सुविधाओं में स्थायी सुधार की दिशा में एक सक्षम व्यवस्था का निर्माण करता है। दोनों लैब्स ने साफ-सफाई, उपकरण कैलिब्रेशन, तकनीशियन प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रक्रियाओं और रोगी संतुष्टि जैसे सभी बिंदुओं पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। मूल्यांकन टीमों ने भी दोनों लैब्स की कार्यप्रणाली और सैंपल परीक्षण व्यवस्था की सराहना की है।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर IPHL टीमों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और IPHL मॉडल ने ग्रामीण, आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में जांच सेवाओं को विश्वसनीय और सुलभ बनाने का मार्ग मजबूत किया है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में सभी जिला अस्पतालों को इसी आधुनिक और मानकीकृत मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने उपलब्धि को स्वास्थ्य प्रणाली में आए बड़े बदलाव का परिणाम बताया और कहा कि सरकार प्राथमिक से लेकर जिला स्तर तक सभी संस्थानों को आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत गुणवत्ता तंत्र से सुसज्जित कर रही है।
छत्तीसगढ़ में IPHL मॉडल का विस्तार भविष्य में लाखों लोगों को सीधे लाभ पहुंचाएगा। जांच सेवाएं तेज, विश्वसनीय और किफायती होंगी, जिससे स्वास्थ्य सूचकांकों में भी उल्लेखनीय सुधार की अपेक्षा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल प्रमाणन नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि वैज्ञानिक मानकों, आधुनिक तकनीक और मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव संभव है। यह सफल मॉडल आने वाले समय में देशभर में स्वास्थ्य गुणवत्ता सुधार के लिए नई दिशा तय करेगा।