बालोद जिले में धान खरीदी बंद होने के बाद लगभग 22 दिन का समय गुजर चुका है। बावजूद इसके खरीदी केंद्रों में लाखों क्विंटल धान जमा है, जब जिम्मेदार अधिकारी डीएमओ से इस पूरे मामले में कुछ पूछा जाता है तो कैमरे में कुछ भी बताने से इंकार करते हैं। पिछले साल जीरो शॉर्टेज का तमगा लेने वाले डीएमओ के इस कार्यकाल में धान को चूहे खा रहे हैं और धान भी बर्बाद होने की स्थिति में है। वहीं, कलेक्टर ने पूरे मामले में कहा की इस बार उम्मीद से ज्यादा धान खरीदी हुई है। शासन को उठाव के लिए डिमांड भेजा गया है। जल्द ही उठाव किया जाएगा।
बालोद जिले में कलेक्टर जहां एक तरफ व्यवस्थित धान खरीदी के बाद अब व्यवस्थित रूप से धान के परिवहन को लेकर व्यवस्था बना रहे हैं। वहीं, संबंधित विभाग की देख रेख में धान को चूहे चट कर जा रहे हैं। बालोद जिले के लाटाबोड़ सोसायटियों में धान को चूहे से बचाने अब बोरे बदले जा रहे हैं। वहीं, कुछ प्रबंधकों का कहना है कि हर बार प्रबंधक अपनी तनख्वाह के पैसे से शॉर्टज नहीं भर सकते।
आपको बता दें इस बार संग्रहण केंद्रों में धान थोड़ा भी नहीं है सीधे उठाव किया जा रहा है। इस सत्र पूरे जिले में 74.87 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई है और 1 लाख 44 हजार 481 किसानों ने अपना धान बेचा है। भले ही धान संग्रहण केंद्र इस बार खाली हों, लेकिन मार्कफेड विभाग के लोगों ने संग्रहण केंद्रों में पार्टियां खूब की है। यह विषय भी धान खरीदी के बाद चर्चा में रही यह मामला धान संग्रहण केंद्र ग्राम जगतरा का बताया जा रहा है।