राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव और माओवाद प्रभावित बस्तर के आईजी पुलिस शिवराम प्रसाद कल्लूरी के खिलाफ सम्मन जारी किए हैं। इस सम्मन में दोनों अधिकारियों के खिलाफ मानव अधिकार कार्यकर्ताओं से सत्ता का दुरुपयोग कर दुश्मनी निकालने का आरोप लगाया गया है।
मानवाधिकार आयोग ने डीयू प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, जेएनयू प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, विनीत तिवारी, सीपीआई(एम) कार्यकर्ता संजय और मंजू कवासी पर लगे हत्या, आपराधिक अनाधिकृत प्रवेश, षड़यंत्र समेत कई आपराधिक मामलो का स्वत: संज्ञान लिया। ये आरोप लगाए गए थे बस्तर पुलिस प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और अन्य एसोसिएट प्रोफेसर को गिरफ्तार करने की धमकी दे रही है।
छत्तीसगढ़ में विपक्षी दल कांग्रेस समेत दूसरे राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने कहा था कि बस्तर में फर्जी मुठभेड़ों में निर्दोष आदिवासियों को मारा जा रहा है। जबकि गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा था कि छत्तीसगढ़ सरकार संविधान के दायरे में माओवादियों के साथ संवाद करने के पक्ष में है।
मानव अधिकार आयोग ने अब इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए दोनों अधिकारियों के खिलाफ यह सम्मन जारी किया है और दोनों आधिकारियों को 30 नवंबर तक आयोग के समक्ष पेश होकर अपनी सफाई देने को कहा है।