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Naxalites attack in dantewada: थके हुए जवानों पर नक्सलियों ने किया हमला; सर्चिंग के बाद लौट रहे थे जवान

Wed, 26 Apr 2023 05:04 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के अरनपुर में बुधवार दोपहर को नक्सली हमले में 10 जवान शहीद हो गए। वहीं एक नागरिक भी शहीद हो गया। सभी जवान डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के हैं। नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर जवान सर्चिंग के लिए निकले थे
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दंतेवाड़ा में नक्सली हमला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के अरनपुर में बुधवार दोपहर को नक्सली हमले में 10 जवान शहीद हो गए। वहीं एक नागरिक भी दिवंगत हो गया। सभी जवान डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के हैं। नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर जवान सर्चिंग के लिए निकले थे। इसी दौरान नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर दिया। सूचना पर अतिरिक्त फोर्स और शवों को लाने के लिए 9 वाहन भेजे गए हैं। 
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नक्सलियों ने गाड़ी नंबर दो को बनाया निशाना
बताया जाता है कि गांव को लोगों ने त्योहारी सीजन में चंदा लेने के लिए डीआरजी के वाहनों को रोका। इसके बाद जवानों की पहली गाड़ी नहीं रुकी। इसके बाद गाड़ी नंबर दो के जवान समझे कि ग्रामीण चंदा मांग रहे हैं, इसलिए गाड़ी नंबर दो रुक गई। फिर इसके कुछ देर बाद रवाना हुई। वहां से 100 मीटर दूर जाने पर IED विस्फोट हुआ। जिसमें 10 जवान मौके पर ही शहीद हो गए। वहीं एक वाहन चालक भी दिवंगत हो गया। 


बताया जाता है कि सभी जवान सर्चिग पर निकले थे। लगातार सर्चिग की वजह से थक गए थे। जवानों के शव क्षत-विक्षत पाए गए हैं, जिसका हम फोटो नहीं दिखा सकते। दो साल बाद छत्तीसगढ़ में बड़ा नक्सली हमला किया गया है। बताया जाता है कि नक्सलियों ने 50 से 60 किलो आईईडी लगाया था। मौके पर 5 से 7 फीट के गहरे गड्ढे हो गए हैं। इस घटना को लेकर बड़ी पर प्रशासनिक चूक बताई जा रही है। जवनाों को नक्सली एरिया में वाहन से सवार होकर जाने पर मना है। इसके बाद भी जवान दो प्राइवेट गाड़ी में सवार होकर जा रहे थे। इस दौरान सटीक मुखबिरी की सूचना पर नक्सलियों ने घात लगाकर इस घटना को अंजाम दिया। 
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बड़ी प्रशासनिक चूक, सुलगते सवाल
  • पहला सवाल ये है कि 20 से 25 जवान दो प्राइवेट वाहन में बैठकर क्यों आ रहे थे।
  • नक्सल एरिया में वाहन से बड़ी सख्या में आने पर मना है फिर क्यों वाहन में बैठे? 
  • जवानों को लाने के लिए इतनी बड़ी जल्दी क्यों थी? 
  • क्या इन्हें किसी कैंप में ठहराया नहीं जा सकता था?
  • प्राइवेट वाहन की सुविधा किसने और क्यों उपलब्ध कराई?
  • किसने नियम-कायदे को ताक पर रखकर बडे़ हादसे को मोल लिया?
  • प्रशासनिक सुरक्षा में भारी चुक?


दूसरी ओर गृहमंत्री अमित शाह ने भी नक्सली हमले को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बात की है। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। 



क्या है डीआरजी?
बस्तर में एक लोकल बटालियन होती है, जिसका नाम DRG यानी डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गॉर्ड  होता है। इसमें लोकल जवान और आत्मसमर्पित नक्सलियों का दल होता है। डीआरजी के जवान अब तक बस्तर में नक्सलियों को मात देते रहे हैं।  
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