कांग्रेस ने गठित किया पांच सदस्यीय जांच दल
परिवार वालों ने पोर्टा केबिन में रहने के दौरान बच्चे के स्वास्थ्य होने की बात को झूठा और निराधार बताया और कहा कि बच्चा पोर्टा केबिन दुगाईगुड़ा में रहने के दौरान ही बीमार हुआ था। इस पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश कारम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल गठित किया था। इसमें सदस्य ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुकलू पुनेम, जनपद सदस्य मनोज अवलम, अनीता तेलम और श्रीमती सरस्वती वासम आदि शामिल थे।
दोस्तों से भी बात कर जानकारी इकट्ठा की
पांच सदस्यीय जांच दल ने दो अप्रैल को मृतक छात्र के गृह ग्राम जिन्निप्पा, दुगाईगुड़ा पोर्टा केबिन का दौरा कर मृतक के परिजनों के बयान लिए। पोर्टा केबिन के अधीक्षक समेत अन्य कर्मचारियों और मृतक नीतीश ध्रुवा के दोस्तों से भी बात कर जानकारी इकट्ठा की, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। ये तथ्य बीजापुर जिले में हो रहे भ्रष्टाचार और अधिकारियों की लफ़रवाही को स्पष्ट रूप से उजागर करता है, जिनकी उच्चस्तरीय जांच होनी अति आवश्यक है।
सामने आए ये तथ्य
1. परीक्षाओं के समय एक छात्र पोर्टा केबिन में बीमार पड़ा हुआ है और इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पोर्टा केबिन के अधीक्षक को ही पता नहीं। जाँच दल को पोर्टा केबिन के अधीक्षक बोड़के भास्कर स्वयं बताते हैं कि छात्र के मौत की जानकारी उन्हें फोन एक अप्रैल को मिली है।
2. मृतक छात्र की मौत के बाद परिजन अंतिम संस्कार करने की तैयारी में जुटे हुए थे और दूसरी तरफ़ शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने एक फर्जी पंचनामा बनाया, जिसमें मृतक छात्र के परिजनों से जबरन हस्ताक्षर कराए गए। इस संबंध में गांव में कोई बैठक भी नहीं हुई है।
3. मामले को रफा-दफा। करने के लिए शिक्षा विभाग के बीईओ, बीआरसी और अधीक्षक ने मृतक छात्र के परिजनों को 45 हज़ार रुपये देने की पेशकस किए और पांच हजार रुपये अग्रिम भुगतान किया। शेष 40 हजार रुपये साथ ही कुछ अन्य समान बाद में देने की बात हुई है।
4. परिजनों ने कहा कि पोर्टा केबिन में रहने के दौरान छात्र की तबीयत खराब नहीं थी। यहा बात पूरी तरह झूठा और निराधार है। बच्चा बीमार था और बिस्तर में ही पड़ा था, उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था
परिवार को रुपये की पेशकश की जा रही
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बीजापुर के विधायक और कांग्रेस नेता विक्रम मंडावी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 'अब आदिवासी बहुल क्षेत्र बीजापुर में यह स्थिति हो गई है कि छात्र की मौत के बाद मामले को रफा-दफा करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा पीड़ित परिवार को रुपये की पेशकश की जा रही है। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम किस तरह के समाज का निर्माण कर रहे हैं।'
भाजपा सरकार में छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है, तब से लगातार बीजापुर जिले के आश्रमों, पोर्टा केबिनों और छात्रावासों में पढ़ने वाले आदिवासी छात्र छात्राओं की कोई सुरक्षा नहीं है। आए दिन स्कूल छात्रावासों में कोई न कोई घटना घटित होती है और इन घटनाओं में छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है, लेकिन आज पर्यन्त तक किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं होना, इस बात का प्रमाण है कि भाजपा सरकार में छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं है। इसलिए शासन प्रशासन से मांग है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। कार्रवाई नहीं होने पर आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं को रोकने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।