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CG: छेरछेरा तिहार में दिखी लोक परंपरा की जीवंत तस्वीर, घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंकराम वर्मा ने निभाई परंपरा

Sat, 03 Jan 2026 03:35 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी पहुंचे, जहां उन्होंने पारंपरिक रीति से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। गांव में लोक पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला और पूरे वातावरण में अपनत्व व सांस्कृतिक उल्लास झलकता रहा।
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घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक छेरछेरा तिहार इस वर्ष भी पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी पहुंचे, जहां उन्होंने पारंपरिक रीति से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। गांव में लोक पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला और पूरे वातावरण में अपनत्व व सांस्कृतिक उल्लास झलकता रहा।
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छेरछेरा की परंपरा निभाते हुए मंत्री टंक राम वर्मा ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा ऐसा लोक पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को मजबूत करता है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और आपसी भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं।
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कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने पारंपरिक अंदाज में मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ लोक पर्व में भागीदारी निभाई। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।



छेरछेरा छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख पारंपरिक लोक पर्व है, जिसे धान की कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर–जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है, जहां किसान फसल कटने के बाद ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है। छेरछेरा दान, सहयोग और सामाजिक एकता का पर्व माना जाता है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान एकत्र करते हैं। “छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…” जैसे लोकगीतों के माध्यम से दान की परंपरा निभाई जाती है। एकत्रित अन्न और सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता और सामाजिक कार्यों में किया जाता है। छेरछेरा तिहार के जरिए एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं की जीवंत झलक सामने आई, जिसने सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहयोग का सशक्त संदेश दिया।
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