छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है। चिकित्सकों ने 21 सितंबर से ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की है। साथ ही, इमरजेंसी सेवाएं भी बंद करने की चेतावनी दी है। डॉक्टरों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम आवेदन भी सौंपा है।
जूनियर डॉक्टरों के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगों में स्टाइपेंड, वेतन में संशोधन और चिकित्सा सेवाओं तथा चिकित्सकों से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दे शामिल हैं। राज्य के जूनियर डॉक्टरों ने 17 सूत्री मांगों को लेकर पहले भी सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी थी। हालांकि, इसके बाद भी उनकी मांगों को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है।
डॉक्टरों ने बताया कि एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड के विषय में 19 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था। स्वास्थ्य मंत्री ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर संदेश भी जारी किया था, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हो सकी है। उस समय मीडिया रिपोर्टों में 25 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड देने और 1 सितंबर से बढ़ी हुई राशि मिलने की बात कही गई थी।
केवल आश्वासन, मांगें अधूरी
डॉ राधेश्याम ने बताया कि सरकार से मिले आश्वासन के बाद भी अब तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ है। इस कारण पूरे प्रदेश के चिकित्सकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में 21 सितंबर से ओपीडी बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही चिकित्सकों ने 23 सितंबर से आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह बंद करने का एलान किया है। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि इससे पहले भी कई दिनों तक आंदोलन करने पर उन्हें केवल आश्वासन ही दिया गया था, लेकिन कोई मांग पूरी नहीं की गई।