सोमवार को सुकमा में तकरीबन 40-50 नक्सलियों के एक समूह ने पूर्व पुलिस कॉन्सटेबल को पुलिस मुखबिर कहते हुए मार डाला। साथ ही नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के दोरनापाल में एनएच-30 पर स्थित तीन बसों और तीन ट्रकों को भी आग के हवाले कर दिया। नक्सलियों के अचानक धावा बोलने से वहां हड़कंप मच गया।
जलती हुई बसों से यात्रियों को नीचे उतारा गया। सूत्रों के अनुसार यह हमला नक्सलियों ने बदला लेने के लिए किया है। हाल ही में बीजापुर में ग्रेहाउण्ड फोर्सिस ने 10 नक्सलियों को मारा गिराया था। आए दिन नक्सलियों के हमले बढ़ते जा रहे हैं। इससे पहले 24 जनवरी को भी छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सली हमला हुआ था। हमले में मुठभेड़ के दौरान चार जवान शहीद और 11 जवान घायल हो गए थे।
छत्तीसगढ़ के सुकमा में पुलिस और नक्सलियों के बीच 18 फरवरी को भी मुठभेड़ हुई थी। जिसमें दो जवान शहीद हो गए थे। यह मुठभेड़ तकरीबन 5 घंटे चली थी। वहीं पुलिस द्वारा एक नक्सली को मारा भी गया। शहीद हुए जवानों में एक एसटीएफ और एक डीआरजी से जुड़े थे।
छत्तीसगढ़ के निवासियों को इन हमलों से तो इससे परेशानी होती ही है साथ ही आए दिन जवान भी शहीद होते हैं। छत्तीसगढ़ का विकास भी इससे प्रभावित हो रहा है। 18 फरवरी का हमला भी सुकमा में भेज्जी थाना के अंतर्गत वहीं हुआ जहां सड़क निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण कार्य में बाधा पहुंचाते हुए नक्सलियों ने वहां मौजूद निर्माण कंपनी के मैनेजर को गोली मार दी, जिसकी बाद उसकी मौत हो गई। इस दौरान कुछ ग्रामीण भी घायल हो गए थे।