छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने यौन संबंधों के लिए सहमति की उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल किए जाने के केंद्र के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि इससे पश्चिमी सोच प्रदर्शित होती है। इससे अवांछित गर्भ, गर्भपात और युवाओं में यौन संचारी रोग जैसी समस्याएं बढ़ सकती है।
रमन सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे एक पत्र में कहा कि सेक्स के लिए सहमति की उम्र घटाया जाना युवाओं में निश्चित तौर पर यौन संबंधी प्रयोग को आमंत्रण होगा।
16 की उम्र में सेक्सः हंगामा क्यों है बरपा
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सेक्स के लिए सहमति की उम्र 18 साल रखे जाने के पक्षधर लोग सरकार को यह समझाने में विफल रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य खतरों के प्रति जागरूकता कम हैं।
उन्होंने कहा कि खून की कमी की समस्या बड़े पैमाने पर है और सहमति से सेक्स होने पर भी गरीब लड़कियां सबसे ज्यादा प्रभावित होगी, गर्भपात और अवांछित गर्भ की समस्या तेजी से फैल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में यौन शिक्षा अच्छी तरह से व्यवस्थित नहीं है और इसका कारण यह है कि स्कूलों में यौन शिक्षा लागू किए जाने का ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि 16 साल की उम्र में युवाओं में अपेक्षाकृत जागरूकता की कमी की वजह से यौन संचारी रोगों और एचआईवी एड्स से संबंधित जोखिम काफी बढ़ सकते हैं।
सहमति से सेक्स की उम्र क्या 16 वर्ष होना चाहिए?
रमन सिंह ने कहा कि गरीबों को खास तौर पर पोषक आहार नहीं मिलता और इसलिए उनके लिए ज्यादा खतरा है। उनके लिए सेक्स की सहमति की उम्र 16 साल किया जाना न तो शारीरिक रूप से वांछनीय है और न ही मनोवैज्ञानिक रूप से क्योंकि कुछ चिकित्सा विशेषज्ञ उल्लेख कर चुके हैं, और दोबारा से यह कि सेक्स के लिए रजामंदी की उम्र घटाए जाने से लड़कियों की तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी है जिसमें सेक्स संबंधों की लिए रजामंदी की उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल किए जाने तथा बलात्कार को लैंगिक विशिष्ट अपराध बनाए जाने का प्रावधान है जिसके तहत सिर्फ पुरुषों पर ही इसके लिए आरोप लगाया जा सकता है।