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Korba: SECL कुसमुंडा खदान में हैवी ब्लास्टिंग का लाइव वीडियो आया सामने, ग्रामीणों का विरोध तेज

Tue, 16 Sep 2025 12:54 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

छत्तीसगढ़ के कोरबा एसईसीएल कुसमुंडा खदान में की गई हैवी ब्लास्टिंग का लाइव वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
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ब्लास्टिंग का लाइव वीडियो आया सामने - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के कोरबा एसईसीएल कुसमुंडा खदान में की गई हैवी ब्लास्टिंग का लाइव वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। ब्लास्टिंग से जटराज, सोनपुरी, पाली, पडनिया समेत आसपास के गांव और बस्तियां प्रभावित हुईं। जटराज गांव में एक ग्रामीण के घर में दरार तक आ गई। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीण मौके पर पहुंचे और विभागीय अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाई। ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह करीब 8:15 बजे ब्लास्टिंग की गई, जबकि नियमानुसार ब्लास्टिंग का समय दोपहर 2 बजे तय है। साथ ही ब्लास्टिंग से पहले 3 किलोमीटर दायरे को खाली कराना होता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल ने उनकी जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया है, लेकिन अब तक मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास की सुविधा नहीं दी गई है। इसी कारण लोग लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इस घटना से गुस्साए ग्रामीण अब कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराया है। इधर खदान के लिए जमीन नापी करने पहुंची एसईसीएल व प्रशासन की टीम को ग्रामीणों ने  जोरदार विरोध किया है।
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बताया जा रहा है कि हरदीबाजार हॉस्पिटल मोहल्ले में शुक्रवार को खदान के लिए मकान नापी और जमीन सर्वे करने पहुंची एसईसीएल व प्रशासन की टीम को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। हालात बिगड़ते देख टीम को बैरंग लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने त्रिपक्षीय वार्ता को छलावा और धोखा बताते हुए एसईसीएल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामवासी, सरपंच लोकेश्वर कंवर, पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर और भाजपा जिला मंत्री अजय दुबे मौजूद रहे।
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ग्रामवासियों ने बताया कि बीते दिनों तहसील पाली में हुई त्रिपक्षीय बैठक में गांव के हितों को ध्यान में रखते हुए 7 सूत्रीय मांगें रखी गई थीं, जिसमें उचित मुआवजा, नौकरी और सर्वसुविधायुक्त बसाहट की बात शामिल थी। इस पर एसईसीएल की ओर से लिखित सहमति देने की बात हुई थी, लेकिन बिना सहमति लिए अचानक नापी शुरू की गई। ग्रामीणों के तीखे विरोध के चलते टीम को पीछे के रास्ते से दीपका हाउस लौटना पड़ा। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सामूहिक हस्ताक्षर कर हरदीबाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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